बुधवार को ट्रैक्टर एजेंसी पर बकाया रुपये देने जाते समय अगवा किया गया संतोष गुरुवार की सुबह अपनी बहन के घर लखीमपुुुर खीरी जिले के सिकंद्राबाद में पहुंच गया। उसने बताया कि बोलेरो सवार कुछ लोगों ने उसका अपहरण किया। बाद में किसी तरह वह वाहन की खिड़की से कूदकर भागा। पुलिस के अनुसार युवकी की कहानी गले नहीं उतर रही है। जांच में मामला साफ होगा।
गांव मटेहना निवासी परशुराम ने बुधवार की दोपहर घुंघचाई पुलिस चौकी पहुंचकर पुलिस को बताया था कि उसका पुत्र नौ सितंबर की सुबह पूरनपुर स्थित एक ट्रैक्टर एजेंसी पर बकाया छह सौ रुपये जमा करने बाइक से गया था। रास्ते में उसका अपहरण कर लिया गया है। संतोष ने लखीमपुर में अपनी बहन के मोबाइल पर अपहरण होने की जानकारी दी है। गुरुवार की सुबह चार बजे वह अपनी बहन के घर सिकंद्राबाद पहुंच गया। वहां से पुलिस उसे थाने लाई और पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि गांव कल्यानपुर से कुछ आगे सड़क किनारे एक बोलेरो खड़ी थी। पास में खड़े चार लोगों ने हाथ देकर उसकी बाइक रोक ली और धक्का लगाने को कहा। बोलेरो में धक्का लगाते समय तीन तीन बदमाशों ने उसे उठाकर गाड़ी में डाल लिया और एक मौके पर ही रुक गया। बदमाश उसे खुटार रोड से शाहजहांपुर की ओर ले गए। चीनी मिल के पास पहुंचने पर उसकी आंखों में पट्टी बांध दी। इसके बाद उसे शाहजहांपुर ले जाकर एक घर में रखा गया। जहां से शाम को सात बजे उसे गाड़ी में बैठाकर रात 11 बजे लखीमपुर ले जाकर एक घर में रखा। बृहस्पतिवार को सुबह चार बजे बोलेरो से उसे सिकंद्राबाद के समीप एक नहर पटरी पर ले जा रहे थे। रास्ते में बदमाश उसे गाड़ी में बंद कर खुद शौच को चले गए। इसी बीच वह शीशा खोलकर भाग खड़ा हुुआ।
इंस्पेक्टर शक्ति सिंह ने बताया कि पुलिस ने बुधवार की देर शाम मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई तो संतोष की लोकशेन घटना के दिन सुबह 10 बजे शाहजहांपुर में पाई गई। बुधवार की शाम साढ़े पांच बजे उसकी लोकेशन सिकंद्राबाद में मिली। इस पर पुलिस ने उसकी तलाश सिकंदराबाद और आसपास की, लेकिन वह नहीं मिला। उसकी बहन को गुरुवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। वह पूरनपुर पहुंचती, इससे पहले ही संतोष उसके घर पहुंच गया।
कहानी में कई पेंच
अपहृत संतोष ने बताया कि बोलोरो में बंद होने के दौरान वह बीच वाली शीट पर बैठा था। वह खिड़की के शीशा को एक साइड में कर निकल भागा है। पुलिस का कहना है कि बोलेरो में बीच की शीट वाला शीशा एक साइड में हटाने वाला नहीं होता। ऊपर, नीचे होता है। पिछला शीशा भी इतना चौड़ा नहीं होता कि अचानक युवक शीशा हटाकर कूद कर भाग जाए। संतोष की उसकी बहन से बात शाम साढ़े पांच बजे हुई। जबकि अपराह्न तीन बजे ही उसके परिवार वाले संगीता के पास फोन पहुंचने की जानकारी दे रहे थे। बुधवार को शाम साढ़े पांच बजे से संतोष के मोबाइल की लोकेशन सिकंद्राबाद में मिल रही थी। इसी तरह पहले कहा गया कि उसे मारापीटा गया, बाद में इससे इंकार किया। उधर संतोष ने कोई कार्रवाई से इनकार किया है।