त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश योगेश चंद्र त्रिपाठी ने साढ़े तीन साल पुराने श्रीकृष्ण हत्याकांड के तीन आरोपियों को दोषी पाकर आजीवन कारावास और प्रत्येक को छह हजार रुपये जुर्माना सुनाया है। सजा पाए आरोपी दंपति और उनका पुत्र है। गांव मुडगवां निवासी अनिल कुमार जाटव ने 10 मई 2012 को थाना बिलसंडा पर रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके अनुसार उसके पिता श्रीकृष्ण सुबह छह बजे घर के सामने जगह में मिट्टी डाल रहे थे। उसी समय उसके ताऊ शहजादे उर्फ मनोज कुमार अपनी पत्नी मीना पुत्र संजीव कुमार उर्फ गुड्डू और अनीता के साथ भाला व लाठी लेकर आए और मिट्टी डालने से नाराज होकर जान से मारने की नीयत से श्रीकृष्ण के सीने में भाला मार दिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर भाग गए। पुलिस ने विवेचना के बाद चारों आरोपियों पर चार्ट शीट दाखिल की। संजीव के पास से हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद किया। शासकीय अधिवक्ता अभय कुमार सक्सेना ने गवाहों के बयान दर्ज कराए। मामले की सुनवाई के बाद त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश योगेश चंद्र त्रिपाठी ने साक्ष्य के अभाव में अनीता को दोषमुक्त कर दिया। बाकी तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास और प्रत्येक को छह हजार रुपये जुर्माना सुनाया है। संजीव को शस्त्र अधिनियम में भी एक साल की सजा और एक हजार रुपये जुर्माना सुनाया गया है।