दूसरे प्रांत से मजदूरी कर घर वापस लौट रहे तीन युवक जहरखुरान गिरोह का
शिकार हो गए। तीनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गिरोह के
सदस्य एक युवक के पास से छह हजार रुपये, मोबाइल व अन्य सामान लूट ले गए,
जबकि दो यात्री बेहोशी की हालत में हैं।
जिला अस्पताल में भर्ती कराए
गए थाना माधोटांडा के गांव संडई निवासी राजेश कुमार हरियाणा में मजदूरी
करता है। उसने बताया कि दो दिन पहले घर वालों ने पुत्री आरती की तबियत खराब
होने की जानकारी दी थी।
जिस पर हरियाणा से बरेली पहुंचा और बरेली से ट्रेन
पर सवार होकर पीलीभीत आ रहा था। सेंथल रेलवे स्टेशन के पास दो युवकों ने
बिस्कुट में मिलाकर नशीला पदार्थ खिला दिया। जिससे वह बेहोश हो गया। उसे जब
होश आया तो वह जीआरपी थाना पीलीभीत में था।
जीआरपी वालों ने उसके घर पर
सूचना दी। सूचना पर पहुंचे परिवार वालों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती
कराया है। जहरखुरान उसके छह हजार रुपये, बैग, मोबाइल आदि समान लूट ले गए।
उधर दिल्ली से काम करके लौट रहे दो युवक टनकपुर डिपो की रोडवेज बस में
जहरखुरान गिरोह का शिकार हो गए। बस चालक एनबी सिंह और परिचालक रामप्रसाद ने
दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। दोनों के बैग तो सुरक्षित मिले
हैं, लेकिन मोबाइल और नकदी नहीं निकली।
त्योहार पर सक्रिय हो जाते हैं जहरखुरान
पीलीभीत।
त्योहार नजदीक आते ही बसों और ट्रेनों में जहरखुरान सक्रिय हो जाते हैं।
गिरोह के लोग यात्रियों को भरोसे में लेकर उनकी कमाई पल भर में उड़ा लेते
हैं। कभी-कभी तो जहरीला पदार्थ उनकी जान खतरे में डाल देता है।
रोडवेज बस
यात्रियों की मानें तो मुरादाबाद मंडल के गजरौला में जहरखुरानी गिरोह
सक्रिय है। ट्रेन में बरेली-पीलीभीत के बीच सेंथल रेलवे स्टेशन तक घटनाएं
होती हैं। अस्पताल से मेमों जाने के बाद भी पुलिस घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज
नहीं करती है।
महंगाई के दौर में लोग अपना घर-परिवार छोड़कर दो जून की
रोटी जुटाने के लिए बाहर जाते हैं। परिवार के लिए कुछ रुपये बचाकर वापस
लौटते समय जहरखुरानी का शिकार हो जाते हैं।
ढाई माह में पीलीभीत के अलावा
लखीमपुर-खीरी, शाहजहांपुर, चंदोली समेत कई जिलों के करीब 14 लोग अब तक
जहरखुरानी का शिकार हो चुके हैं। इन लोगों की माने तो अमरोहा जिले में
गजरौला के एक ढाबे पर गिरोह के सदस्य सक्रिय हैं। शाम को पहुंचने वाली
अधिकतर रोडवेज बसेे कथित ढाबे पर खड़ी होती हैं।
यहां सक्रिय जहरखुरान
खासतौर पर मजदूर पेशे वाले यात्री को अपना निशाना बनाते हैं। बसों का कथित
ढाबे पर रुकना, पुलिस को सूचना न देना आदि ऐसे तमाम सवाल हैं, जो रोडवेज बस
कर्मियों की भूमिका को भी संदेह के घेरे में लाकर खड़ा करते हैं।
पुलिस दर्ज नहीं करती रिपोर्ट
ढाई
महीने में अब तक 14 लोग जहरखुरान का शिकार हुए। अस्पताल कर्मचारियों ने
सभी का मेमो शहर कोतवाली भेजा, लेकिन पुलिस ने एक भी मामले की रिपोर्ट दर्ज
नहीं की। शिकार हुए युवकों से पूछताछ करना भी मुनासिब नहीं समझा। जिससे
पता चल सके कि गिरोह के सदस्य कहां सक्रिय हैं। शहर कोतवाल संग्राम सिंह ने
बताया कि जिला अस्पताल से मेमो आने पर पुलिस शिकार हुए व्यक्ति के बयान
लेती है। शेष कार्रवाई जिस स्थान पर घटना होती है। वहीं से होती है।
ऐसे बनाते हैं शिकार
0 अंगुली में लगे नशीले पाउडर को चाय में मिलाकर पिलाना
0 बिस्कुट में नशीली दवा मिलाकर खिलाना
0 स्टेशन पर मिलने वाली पूड़ी-सब्जी में दवा मिलाकर देना
0 धतूरे के बीज का पाउडर बीड़ी में मिलाकर पिलाना
000
अस्पताल
से आने वाले मेमों पर रिपोर्ट दर्ज कर पड़ताल करनी चाहिए, लेकिन यदि
संबंधित थानेदार कार्रवाई नहीं कर रहें हैं तो इसकी जांच करवाकर कार्रवाई
की जाएगी।
जवाहर, एसपी