थाना सुनगढ़ी पुलिस ने मोहल्ला थान सिंह निवासी राजीव उर्फ टिंकू को 25 अक्तूबर 14 को कुकर्म व पाक्सो एक्ट के मामले में पकड़कर जेल भेजा था। तब से वह जिला कारागार में बंद था। जेल प्रशासन द्वारा बंदी राजीव को मंगलवार 10.28 बजे जेल से बाहर निकाल जिला अस्पताल ले गए जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जेलर महेंद्रपाल ने बताया कि राजीव ने सोमवार की शाम सांस लेने में दिक्कत होना बताई थी। जिस पर जेल डॉक्टर नीरज सिंह ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल भेजा था। जहां पर उपचार के बाद सुधार होने पर डॉक्टरों ने बंदी को पुन: जेल भेज दिया था। मंगलवार की सुबह चाय पीते समय राजीव को खून की उल्टियां हुईं, तब उसे फिर जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मृतक के बड़े भाई प्रकाश लोधी का आरोप है कि उसके भाई को कभी सांस संबंधी कोई बीमारी नहीं रही। आरोप है कि जेल प्रशासन की लापरवाही से उसकी मौत हुई है। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
घर वालों ने डॉक्टरों पर जताया शक
मृतक बंदी के घर वालों ने शव का पोस्टमार्टम करने वाले दोनों डॉक्टरों की नीयत पर शक जताया है। पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद मृतक के भाई प्रकाश, रमेश लोधी आदि ने बताया कि पोस्टमार्टम करने आए डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम के पूर्व ही राजीव की मौत सांस फूलने से होने की बात कही थी। पोस्टमार्टम के बाद जब उन्होंने रिपोर्ट के बारे में जानकारी की तो डॉक्टर ने कुछ बताने से इंकार कर दिया। इस पर घर वालों ने डॉक्टर पर गलत रिपोर्ट तैयार करने का संदेह जताया है।
साहब! बीमार नहीं था मेरा भाई
पीलीभीत। मेरा भाई बिजली मैकेनिक था। उसे कुकुर्म के मामले में झूठा फंसाया गया था। बुधवार को कोर्ट में पेशी पर आए आरोपी भाई से जब मिला था तो वह बिल्कुल ठीक था। उसे कोई बीमारी नहीं थी। यह कहना है मृतक के बड़े भाई प्रकाश लोधी का। उसका कहना है कि जेल प्रशासन की लापरवाही से ही उसके भाई की मौत हुई है।
मोहल्ले में ही चाय-समोसे का व्यापार करने वाले प्रकाश लोधी ने बताया कि वह तीन भाई हैं। मां-बाप की पहले ही मौत हो चुकी है। मंझला भाई प्रदीप हरिद्वार में मजदूरी करता है। परिवार वालों ने सवाल खड़ा किया कि यदि उसका भाई सांस की बीमारी से ग्रसित था तथा सोमवार को जब उसकी हालत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल भेजा गया तो परिवार वालों को इसकी सूचना क्यो नहीं दी गई। यही नहीं सवाल यह भी है कि जब साढ़े दस बजे के करीब उसके भाई की मौत हो गई थी तो भी इसकी सूचना परिवार वालों को डेढ़ बजे क्यों दी गई? जबकि उसका घर शहर में ही है। इस संबंध में जेलर का कहना है कि लिखापढ़ी में देरी के कारण उसके परिवार को सूचना विलंब से दी गई।
डीएम को भी नहीं दी सूचना
बंदी राजीव उर्फ टिंकू की मौत के मामले में जेल प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई है। जेल प्रशासन ने बंदी की मौत होने की जानकारी शाम 6.10 तक डीएम ओएन सिंह को भी नहीं दी थी। डीएम ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। बाद में डीएम ने जानकारी करने के दौरान जेल प्रशासन से कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही है।