हरकत में आया शासन, आईजी ने किया मौका मुआयना
असम हाईवे पर स्थित सिद्धबाबा मंदिर को अतिक्रमण के नाम पर तोड़ने के बाद शुरू हुए बवाल में बुधवार शाम दुबारा पथराव और आगजनी के मामले में जिला प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगने के बाद शासन और लखनऊ में बैठे अफसर तक हरकत में आ गए। शासन ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है। शासन के सख्त रुख को देख मंडल के अधिकारी भी घटना स्थल की ओर दौड़ने लगे हैं। बृहस्पतिवार को आईजी एसके भगत यहां पहुंचे और मौका मुआयना किया। उन्होंने डीएम से बातचीत कर विवाद की वजह तलाशने की कोशिश की। उन्होंने पूरे मामले की जांच गैरजनपद के एएसपी स्तर के अधिकारी से कराने के निर्देश दिए हैं। बृहस्पतिवार दोपहर आईजी एसके भगत काफिले के साथ पीलीभीत पहुंचे। इसकी जानकारी लगते ही एसपी देवरंजन वर्मा, एएसपी डॉ. रामसुरेश यादव, सीओ सिटी निशांक शर्मा मौके पर पहुंच गए। आईजी ने अफसरों की टीम के साथ घटनास्थल देखा। मौके पर मंदिर बना हुआ था या नहीं, इसके बारे में भी पूछताछ की। यह मामला इतना तूल कैसे पकड़ गया, इसकी वजह भी जानना चाही? करीब आधा घंटे मौके पर रुकने के बाद आईजी ने डीएम शीतल वर्मा से मुलाकात कर इस घटना के बारे में बातचीत की। उन्होंने लापरवाही के लग रहे आरोपों की जांच के लिए जोन के किसी अन्य जनपद के एएसपी स्तर के अफसर से जांच कराने की बात कही। यह भी कहा कि वह प्रकरण को लेकर कमिश्नर से बातचीत करेंगे। ताकि मामले इसका निपटारा कराया जा सका। एसपी को उपद्रव करने वालों की धरपकड़ करने का निर्देश दिया। मगर ऐसे लोगों को परेशान न करने की चेतावनी दी जो पथराव, आगजनी या बवाल में शामिल न रहा हो। पुलिस बेवजह किसी को परेशान न करे, इसकी पूरी जिम्मेदारी एसपी को दी गई।
बवाल की वजह से लेकर इसके समाधान के लिए कमिश्नर से बात की जाएगी। किस अन्य जिले के एएसपी से लापरवाही की जांच कराएंगे। उपद्रव करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। इसमें कोई बेगुनाह न फंसे, इसके लिए पूरा सत्यापन करने के एसपी को निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर जितना फोर्स मांगा जाएगा, मुहैया कराएंगे। - एसके भगत, आईजी