कथित गैंगरेप
की पीड़िता 14 वर्षीय किशोरी के मामले में पुलिस ने उसके भाई के साले
(भाभी के मौसेरे भाई) के खिलाफ दुराचार की रिपोर्ट दर्ज कर मामले में
लीपापोती शुरू कर दी है। पीड़िता की मां के बार-बार कहने के बाद भी पुलिस
ने न तो गैंगरेप की रिपोर्ट लिखी और न ही गिरफ्तार आरोपी से घटना के बाबत
ली गई जानकारी को सामने ला रही है। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के
घेरे में है। अधिक रक्तस्राव के कारण हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल
से रेफर कर पुलिस अभिरक्षा में बरेली के जिला महिला अस्पताल में भर्ती
कराया गया है।
शहर की एक किशोरी बुधवार की शाम करीब आठ बजे असम हाइवे
पर सड़ा पुल के पास बेहोश मिली थी। उसकी सलवार खून से सनी थी। सूचना पर
पहुंची पुलिस ने उसे पहले जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन सुधार
न होने पर उसे रात में ही पुलिस अभिरक्षा में बरेली जिला महिला अस्पताल
रेफर कर दिया।
ऐसे शुरू की लीपापोती
पुलिस ने हाइवे किनारे
बेहोश मिली किशोरी को तो तत्परता दिखाते हुए जिला अस्पताल में भर्ती करा
दिया, लेकिन इसके बाद पुलिस इस मामले में भी हमेशा की तरह अपराध कम दर्शाने
के लिए खेल करने में जुट गई। देर रात एसपी ने इतनी बात तो साफगोई के साथ
कही कि किशोरी के साथ दुराचार हुआ है, लेकिन सामूहिक दुराचार की बात पर वह
चुप्पी साध गए।
उनका तर्क था कि किशोरी के होश में आने पर ही स्थिति पता चल
सकेगी। एएसपी भी इस मुद्दे पर कुछ बोलने से कतराते रहे। रही सही कसर
प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह ने पूरी कर दी। सूत्र बताते हैं कि आला
अधिकारियों से मिले संकेत के बाद उन्होंने किशोरी की अनपढ़ मां से सादे
कागज पर अंगूठा लगवा उसकी ओर से मनचाही तहरीर किसी से लिखवाकर किशोरी के
भाई के मौसेरे साले अजय को नामजद कर लिया जिसे घटना के बाद शक के आधार पर
हिरासत में लिया था। गुरुवार को अजय का पुलिस ने चालान भी कर दिया।
ये सवाल पुलिस को कटघरे में कर रहे खड़ा
किशोरी
की मां के चीख-चीख कर गैंगरेप की बात कहने पर पुलिस ने गैंगरेप की रिपोर्ट
क्यों दर्ज नहीं की। एसपी जेके शाही बताते हैं कि किशोरी ने अपने बयानों
में रात चार युवकों के शामिल होने की बात कही थी। जबकि सुनगढ़ी पुलिस का
कहना है कि आरोपी ने पूछताछ में कुछ बताया ही नहीं। सवाल यह है कि जब
बयानों में किशोरी ने चार युवकों को शामिल होने की बात कही तो पुलिस ने
गैंगरेप की रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज की। आरोपी हिरासत में था तो उससे
पूछताछ कर घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे आदि जानकारी जुटाने की कोशिश
क्यों नहीं की? ऐसे कई सवाल हैं जो पुलिस की कार्रवाई को सवालों के घेरे
में लाकर खड़ा कर दिया है।
कपड़े, नाखून आदि की होगी जांच
किशोरी
के प्रारंभिक मेडिकल के बाद पुलिस ने किशोरी के कपड़े, नाखून व बाल तथा
आरोपी की बनियान व अंडरवियर भी कब्जे में लिया है। जिन्हें जांच के लिए
पुलिस विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने की तैयारी कर रही है।
अत्यधिक रक्तस्राव होने से हुई थी बेहोश
एएसपी
सुधीर कुमार बुधवार किशोरी को नशीला पदार्थ खिला रेप की आशंका जता रहे थे,
लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में नशीला पदार्थ खिलाने की पुष्टि नहीं हुई है।
प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह ने बताया कि अधिक रक्तस्राव होने के कारण वह
बेहोश हो गई थी।
किशोरी की मां को नहीं एफआईआर जानकारी
किशोरी
की मां ने अमर उजाला को बताया कि वह पढ़ी लिखी नहीं है। उसने अभी तक प्रथम
सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज नहीं कराई है। उसने बताया कि वह जिला अस्पताल
में पुलिस वालों से रिपोर्ट लिखने की बात कह रही थी, लेकिन सभी उससे यह कह
रहे थे कि जल्दी बरेली चलो, लड़की की हालत ठीक नहीं है। अस्पताल में इलाज
के नाम पर पुलिस ने कुछ कागज पर उससे अंगूठा लगवाया था।
लड़की के बयान के आधार पर बढ़ेगी धारा
किशोरी
को बरेली में होश आ गया है। वह अगर गैंगरेप की बात कह रही है तो दर्ज
मामले में उसके बयान के बाद गैंगरेप की धाराएं बढ़ा दी जाएंगी तथा आरोपियों
को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
जेके शाही, एसपी पीलीभीत