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कर्ज पर कर्ज लेकर हार गया सूरजपाल

Fri, 03 Apr 2015 12:09 AM IST
Dataganj
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कर्ज दर कर्ज लेकर खेती करना किसान सूरजपाल को भारी पड़ गया। बेमौसम बरसात ने आग में घी का काम किया और उसकी फसल को तबाह कर डाला। इन स्थितियों में पत्नी तथा बच्चे का इलाज कराने में असमर्थ महसूस करने पर आखिर उसने आत्मघाती कदम उठा डाला।  
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दातागंज के गांव गढ़ा निवासी सूरजपाल जाटव (28) पुत्र रामचंद्र दो भाई हैं। बड़ा भाई वीरेंद्र दिल्ली में मजदूरी करता है। दोनों भाइयों की खुद की करीब सात बीघा जमीन है। सूरजपाल खेती से परिवार का भरण-पोषण ठीक से नहीं कर पा रहा था। लिहाजा उसने करीब दो साल पहले भूमि विकास बैंक, दातागंज से 60 हजार रुपये का लोन लिया था। पत्नी राधिका, एक लड़का-दो लड़कियों और विधवा मां के साथ गृहस्थी की गाड़ी नहीं खिंचने पर एक साल पहले उसने गांव के ही सूदखोरों से आठ से 10 प्रतिशत के ब्याज पर कर्ज लेना शुरू कर दिया। बाद में इसे चुकाने के लिए कुछ और लोगों से भी रुपये उधार लेने शुरू किए। ब्याज लग-लगकर ये रकम दो लाख के करीब पहुंच गई। इसकी भरपाई के लिए सूरजपाल ने पिछले साल 20 बीघा खेत ठेके पर लेकर उसमें गेहूं की फसल बोई लेकिन बेमौसम बरसात ने उसकी आशाओं पर पानी फेर दिया।
बुधवार मध्यरात्रि करीब तीन बजे सूरजपाल घर से खेत पर जाने की कहकर निकला था। सुबह छह बजे के करीब गांव वालों ने उसका शव वीरपाल के खेत में बबूल के पेड़ से लटका देखा। गले में उसी के तहमद का फंदा कसा था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव उतरवाया।
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दातागंज के एसडीएम ओपी तिवारी ने सूरजपाल के परिवार वालों को पारिवारिक लाभ योजना और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक लाभ दिलाने की संस्तुति की है। उनका कहना है कि फसल के नुकसान का मुआवजा मानक के अनुसार मिलेगा।
सूदखोरों के फेर में फंसकर डूब गया जिंदगी का ‘सूरज’
मौसम की मार और सूदखोरों के मोटे चक्रवृद्धि ब्याज के फेर में फंसकर युवा किसान सूरजपाल अपनी जिंदगी से ही हाथ धो बैठा। सहकारी बैंक से लिए गए लोन को चुकाने की चिंता और गृहस्थी की गाड़ी पटरी पर लाने के फेर में वह सूदखोरों के चंगुल में ऐसा फंसा कि उसकी जिंदगी का ‘सूरज’ ही डूब गया।
दातागंज के गांव गढ़ा के रहने वाले सूरजपाल की उम्र अभी 28 साल ही थी। जल्द शादी हो जाने पर उसके एक बेटा और दो बेटियां हो गईं। एक बेटी तो अभी दुधमुंही है। विधवा मां सुदामा तो इस हादसे से टूट सी गईं हैं। बड़े बेटे के दिल्ली जाने के बाद सूरज ही उनका सहारा था। छोटे बेटे के सहारे ही उनकी बुढ़ापे की गाड़ी खिंच रही थी। लाड़ले बेटे के इस तरह जान गवां देने से ममत्व को गहरा सदमा पहुंचा है। उनकी रुलाई थम नहीं रही। सूरज के बच्चों को कलेजे से लगाकर वह हर आने-जाने वाले को अर्थपूर्ण नजरों से निहारती हैं।
मां ने रुंधे गले से बताती हैं ‘बैंक वाले तो एक बरस ते ना आए.. जे सूदखोर हर दूसरे-तीसरे दिन तगादा करवे दरवाजे पर आ जात थे...सूरज कर्ज चुकावे कूं तैयार हतो...पर ऊपर वारे ने सब पर पानी फेर दयो...फसल खराब है जावे से लल्ला बहुत परेशान हतो...जब वाहे कछु नाहे सूझी तो अपनी जान पै ही बिताय लई...अब इन बच्चन कौ का होगो...कौन देखभाल करैगो।’ मां का करुण कंद्रन सुनकर हर आने-जाने वाले शख्स की भी आंखें नम हो जा रही थीं। 

आठ से 10 प्रतिशत वसूल रहे थे ब्याज
मां सुदामा और सूरज के जानने वाले लोगों का कहना था कि सूदखोर उससे मोटा ब्याज वसूल रहे थे। ये आठ से 10 प्रतिशत के करीब था। असल रकम तो दूर ब्याज चुकाने के लिए सूरज कर्ज पर कर्ज लेता जा रहा था। वह कर्ज और ब्याज के ऐसे दलदल में फंसा कि उबर ही नहीं सका। आखिर उसे मौत को ही गले लगाना पड़ा।

लाश उतारने में छूटे पसीने
पत्नी राधिका से बुधवार की रात तीन बजे सूरज यह कहकर घर से निकले थे कि गेहूं काटने जा रहा हूं। सुबह जब जगार हुई तो उनका शव बबूल के पेड़ पर काफी ऊंचाई पर लटका मिला। पुलिस के आने के बाद शव उतारने में लोगों के पसीने छूट गए। डनलप पर सीढ़ी लगाई गई, तब कहीं जाकर शव उतारा जा सका।
छह महीने पहले आया था घर
भाई की मौत की खबर सुनकर वीरेंद्र दिल्ली से सीधे पोस्टमार्टम हाउस आया। यहां भाई के शव को देखकर अपने आंसुओं को रोक नहीं सका। वीरेंद्र ने बताया, सूरज उसके साथ ही दिल्ली में मजदूरी कर रहा था। छह महीने पहले ही वह ठेके पर खेती करने के लिए गांव आया था। फसल अच्छी हुई थी, लेकिन होनी को तो कुछ और मंजूर था।
नहीं सुन रहा निजाम, सीने से मौत लगा रहा किसान
बदायूं। कर्ज में डूबे किसान की खुदकुशी का यह पहला मामला नहीं है। 27 मार्च को थाना फैजगंज बेहटा क्षेत्र के गांव खेड़ा दासपुर में कर्ज में डूबे किसान राजेश (42) पुत्र मेघ सिंह ने फांसी लगा कर जान दे दी थी। एक सप्ताह में किसान की खुदकुशी का ये दूसरा मामला है। निजाम है कि सुन ही नहीं रहा और गरीब किसान मौत को सीने से लगा रहा है।
मेघ सिंह पर किसान क्रेडिट कार्ड का दो लाख रुपया कर्ज था। उन पर पंजाब नेशनल बैंक ओरछी के प्रबंधक और फील्ड ऑफीसर कर्ज जमा करने के लिए दबाव बना रहे थे। गेहूं की फसल बर्बाद होने से उम्मीदों को पलीता लग चुका था। ऐसे में सूरज को खुदकुशी के अलावा कोई रास्ता नहीं सूझा। इससे पहले 23 मार्च को दातागंज के गांव सेहरा में अफीम की फसल नष्ट होने से किसान पन्नू सिंह (72) की हार्टअटैक से मौत हो गई थी। 22 मार्च को वजीरगंज थाना क्षेत्र के सैदपुर में किसान आशिक अली (65)की हार्टअटैक से मौत हो गई थी। आशिक अली भी गेहूं और आलू की फसल आरिश से नष्ट हो गई थी।
अब ताजा मामला सूरजपाल का है। फसल बर्बाद होने के बाद कर्ज में डूबे चुके सूरजपाल को भी खुदकुशी के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं सूझा। आखिरकार सूरजपाल ने भी मौत को सीने से लगा लिया।
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