यह हादसा शुक्रवार सुबह करीब साढ़े छह बजे हुआ। बिजली के बोर्ड में जिस जगह शार्ट सर्किट से आग लगी उसके समीप बाक्स पर गद्दे रखे हुए थे। आग सबसे पहले इन्हीं गद्दों में आग लगी और फिर विकराल रूप धारण कर लिया। ग्राउंड में योगासन कर रहे बच्चे कक्ष में लगी आग देख घबरा गए। चपरासी राजीव कुमार ने स्कूल में रखे अग्निशमन यंत्रों से आग बुझाने की कोशिश की लेकिन सभी यंत्र धोखा दे गए। आग बुझाने के प्रयास में वह मामूली रूप से झुलस भी गया। वार्डेंन की सूचना पर आधा घंटा बाद पहुंची फायर ब्रिगेड के दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। इस घटना में बिस्तर, तख्त और बालिकाओं की किताबें एवं कपड़े जलकर राख हो गए। घटना की सूचना मिलते ही बीईओ डीएल राना और एबीआरसी रामदास जायसवाल मौके पर पहुंचे और घटना के बाबत बालिकाओं से जानकारी की। जिस कक्ष में आग लगी थी उसमे से बालिकाएं कुछ ही देर पहले ही उठकर बाहर गईं थीं। घटना के वक्त विद्यालय में वार्डेन कुंतीदेवी के अलावा दो शिक्षिकाएं मौजूद थीं। जिन्होंने चपरासी राजीव के साथ बच्चों का सामान बचाने की कोशिश तो की लेकिन आग के विकराल रूप धारण करने की वजह से काफी सामान जल गया।
..वरना हो सकता था बड़ा हादसा
यह तो अच्छा हुआ कि विद्यालय भवन के कक्ष सं. 3 में जिस वक्त आग लगी उस समय सभी बालिकाएं ग्राउंड में योगासन कर रही थीं। अगर कही घटना एक घंटा पहले हुई होती तो किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था। जिस कमरे में आग लगी उसमें कक्षा 6 और 7 की बालिकाएं ही रहती हैं।
स्टोर के बजाय कक्ष में रखा था बिस्तर
विद्यालय प्रशासन की लापरवाही ही कहा जाएगा कि सर्दियों में यूज किए जाने वाले गद्दे रजाई को गर्मियों के समय में स्टोर में रखवाना चाहिए, लेकिन उस बिस्तर के ढेर को वार्डेन ने उसी कक्ष में बिजली के बोर्ड के समीप रखवा दिया। अगर बोर्ड के पास बिस्तर न रखे होते तो शायद आग विकराल रूप धारण नहीं करती। बीईओ डीएल राना से फोन पर जानकारी लेने की कोशिश की गई लेकिन उनके दोनों फोन नंबर बंद मिले।
विद्यालय के जिस कक्ष में शार्ट सर्किट से आग लगी उसमें बिस्तर के अलावा बालिकाओं का सामान रखा था। अधिकांश जलकर राख हो गया। यह तो अच्छा हुआ कि घटना के वक्त बालिकाएं कक्ष में नहीं थीं। वरना निश्चित रूप से बड़ा हादसा हो जाता। अधिकारियों को सूचना दे दी गई है।
कुंतीदेवी, वार्डेन कस्तूरबा विद्यालय ईंटगांव
पशुशाला में लगी आग से दो पशु जिंदा जले
अमरिया। गांव जिठनियां में मच्छरों को भगाने के लिए सुलगाए गए धुएं से अचानक आग लग गई। जिससे उसमें बंधे पांच पशुओं में से एक बकरी व एक गाय की जिंदा जलकर मौत हो गई। जबकि एक भैंस, एक गाय व एक बछड़ा झुलस गया। झुलसे तीनों पशुओं की हालत गंभीर है। पशुओं को बचाने के प्रयास में पशुपालक नन्हेलाल भी झुलस गया।
मेहनत मजदूरी करने वाले गांव जिठनियां निवासी नन्हेलाल काफी गरीब है। उसने मजदूरी से जोड़े गए रुपये से एक-एक कर एक भैंस व दो गाय खरीदी थी। उसका परिवार पशुओं के दूध पर निर्भर था। दूध बिक्री कर वह अपने परिवार का भरण पोषण करता था। गुरुवार की रात पशुशाला में सुलगाए गए धुएं ने उसकी रोजी रोटी छीन ली। रात करीब दो बजे धुएं से उठी लपटों से पशुशाला में आग लग गई। पशुपालक नन्हेलाल ने बताया कि जब आग की आंच लगी तो उन्हें आग लगने की जानकारी हुई। जब तक वह शोरशराबा कर पशुशाला के पास पहुंचते तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। नन्हेलाल ने किसी तरह से एक गाय, एक बछड़ा और एक भैंस को पशुशाला से बाहर निकाल लिया, लेकिन एक बकरी व एक गाय पशुशाला में जिंदा जलकर मर गई। हालांकि पशुओं को निकालते समय आग की चपेट में आकर उसके एक हाथ व सिर के बाल झुलस गए। आग लगने की सूचना पर गांव में हड़कंप मच गया। शोरशराबे पर तमाम ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और बमुश्किल आग पर काबू पाया। झुलसे पशुओं की हालत काफी गंभीर बनी हुई है। उधर रोजी रोटी का जरिया नष्ट होने से परिवार में कोहराम मच गया है।