सिविल जज असगर अली ने दहेज उत्पीड़न के मामले में पति सास और ससुर को दोषी ठहराया है। तीनों को तीन वर्ष कैद और प्रत्येक को 17 हजार रुपये अर्थदंड सुनाया गया है। अर्थदंड की रकम में से 25 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में पीड़िता को दिए जाएंगे।
थाना सुनगढ़ी के गांव चिड़ियादाह निवासी साबिर हुसैन की पुत्री शबनम ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि 22 अक्तूबर 2012 को उसकी शादी थाना फतेहगंज पश्चिमी बरेली के गांव लोहार नगला निवासी सईद अहमद के पुत्र जीशान के साथ हुई है। शादी में हैसियत के अनुसार दान दहेज दिया गया। शादी के बाद ही पति, ससुर, सास फरमूदन दहेज में दो लाख रुपये की मांग करने लगी और उससे मारपीट करने लगी। पहली नवंबर 2012 को पति उसे मायके छोड़ गया। पंचायत करने को दो मार्च 2013 को दिन में दो बजे पति और ससुराल वाले आए फिर भी दो लाख रुपये की मांग जारी रखी। मना करने पर उसे गालियां देकर, लात घुसों और डंडों से मारापीटा। शरीर पर आई चोटों की डाक्टरी पीड़िता शबनम ने जिला अस्पताल में कराई। कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर आरोपियों को कोर्ट में तलब किया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान इश्हाक और वली अहमद के बयान दर्ज हुए। इन गवाहों ने अपने बयानों में दहेज उत्पीड़न के आरोपों की पुष्टि की। मामले की सुनवाई सिविल जज असगर अली की अदालत में हुई। कोर्ट ने सुनवाई के बाद जीशान, सईद अहमद और फरमूदन को तीन वर्ष कैद और 17-17 हजार रुपये जुर्माना सुनाया है। कोर्ट ने निर्णय में लिखा है कि पीड़िता शबनम को जुर्माने की रकम में से 25 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।