मोहल्ला मस्जिद पठानी में रहने वाला विक्की पेशे से प्राइवेट चालक था। उसके माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। दो भाइयों में विक्की छोटा था। दोनों भाई एक साथ रहते थे। बड़े भाई होरीलाल की चार साल पहले मौत हो चुकी है। रामनवमी वाले दिन यानी 28 मार्च को विक्की अपनी तीन माह की बेटी अंशिका को देवी की तरह गोद में उठाकर घर में कन्याओं के बीच में बिठाया था, जिससे वह बेहद खुश था, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। विक्की ने बेटी व कन्याओं को पानी देने के लिए जैसे ही पानी भरा जग उठाने के लिए हाथ बढ़ाया। वहीं कुछ ऊंचाई पर कॉल बनकर जल रही ढिबरी उसके ऊपर आकर अचानक गिर गई। जिससे वह झुलस गया। दो दिन तड़पने के बाद परिवार का चिराग तो बुझ गया। साथ ही उसके मासूम के सिर से पिता का साया उठ गया। विक्की की मौत के बाद अब घर में जेठानी, देवरानी व मासूम अंशिका बची है। दोनों महिलाओं के आंसू नहीं रुक रहे हैं। विक्की की मौत के बाद मासूम की परवरिश व रोजीरोटी का भी संकट उनके सामने खड़ा हो गया है।