वन विभाग ने दावा किया है कि भालू की मौत फार्मर द्वारा जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए लगाई गई बिजली तार की बाड़ की चपेट में आकर हुई थी। जिसे खेत की रखवाली कर रहे आरोपी नौकर ने जंगल में फेंक दिया था। वन विभाग का कहना है कि इस मामले में फार्मर व उसके साथियों की तलाश की जा रही है।
सोमवार को माला रेंज की गढ़ाबीट के कंपार्टमेंट नंबर 133ए में वनविभाग ने जमीन में करीब चार फिट नीचे दबाया गया करीब दो माह पुराना भालू का शव बरामद किया था। इसके बाद से टाइगर रिजर्व में वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहा था। जिसके बाद आनन-फानन में एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया। माला वनक्षेत्राधिकारी डीके सिंह ने दावा किया कि उन्होेंने वनदरोगा देवऋषि और रामेंद्र सिंह के सहयोग से बुधवार ग्राम लालपुर थाना गजरौला निवासी डोरीलाल को गिरफ्तार किया। रेंजर के मुताबिक उसने बताया कि वह नदहा निवासी जीत सिंह के फार्म पर रखवाली करता है। फार्मर ने जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए जंगल की ओर तार फेंसिंग कर रखी है, जिसमें रात को बिजली का करेंट रहता है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में एक भालू इन तारों में चिपक कर मर गया था। जिसे अगले दिन उसने साथी की मदद से जंगल में फेंक दिया था। रेंजर ने बताया कि उसका भालू की हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में चालान भेजा गया है। शेष आरोपियों की तलाश की जा रही है।
अभी भी कई सवाल हैं बाकी
वन विभाग के अधिकारी भले ही मजदूरी पेशा डोरीलाल को भालू की हत्या की साजिश में गिरफ्तार कर मामले के खुलासे की बात कह खुश हो रहे हों, लेकिन अभी भी कई सवाल हैं जिसका उत्तर मिले बिना वनकर्मियों पर लगा सवालिया निशान हटना मुश्किल है। वन विभाग की इस कहानी को ही अगर सही मान लें तो खेत की रखवाली करने वाले नौकर से कहीं अधिक दोषी वह फार्मर होना चाहिए जिसने बाड़ लगाई थी। उसे विभाग ने क्यों नहीं गिरफ्तार किया? वन विभाग खुद कह रहा है कि आरोपी ने भालू के करंट से मरने के बाद उसके शव को जंगल में फेंका था, लेकिन शव चार फिट गड्ढे में गड़ा मिला। यह शव किसने गाड़ा? ऐसा करते समय वन कर्मियों को इसकी जानकारी क्यो नहीं हुई। वन विभाग को इसका भी उत्तर खोजना होगा।