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बवाल के बाद दूसरे दिन भी रहा शहर में तनाव

Thu, 24 Dec 2015 11:50 PM IST
plibhit
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ईद मिलादुन्नवी के मौके पर बुधवार की आधी रात हसन मियां कदीरी पक्ष के लोगों को बिना अनुमति शहर में जुलूस निकालने से रोकने के दौरान पुलिस व पब्लिक में संघर्ष हो गया। इसमें पथराव व फायरिंग होने पर किए गए लाठीचार्ज की घटना को लेकर दूसरे दिन भी शहर में तनाव का माहौल रहा। रात 12.00 बजे के बाद घटी इस घटना पर काबू पाने के लिए पुलिस प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ी। इस उपद्रव में एएसपी सुधीर कुमार सिंह समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए। वहीं करीब दस नागरिक भी घायल हो गए। घायलों में 14 वर्षीय समीर सहित तीन की हालत गंभीर होने पर उन्हें बरेली रेफर किया गया है। गुरुवार को शांति व सुरक्षा के दृष्टिकोण से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। सुबह डीआईजी आरकेएस राठौर ने यहां पहुंचकर घटना की जानकारी ली। इस मामले में पुलिस ने 10 नामजद और करीब छह-सात सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या प्रयास व बलवा आदि का मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
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बारावफात के जुलूस को लेकर पिछले कई वर्षों से एक ही धर्म के दो गुटों के बीच चले आ रहे विवाद को शांत करने के प्रयास में पिछले कई दिनों से जुटा प्रशासन आखिर इस बार कामयाब नहीं हो सका। काफी प्रयास के बाद जिला प्रशासन आस्ताने हशमतिया से जरताब रजा की अगुवाई में कड़ी सुरक्षा के बीच जुलूस निकलवाने में तो कामयाब हो गया, लेकिन अल्लाहू मियां के मजार के पास से जुलूस निकालने पर अड़े मौलाना हसनमियां कदीरी को जुलूस निकालने से रोक पाने की प्रशासन की रणनीति कामयाब नहीं हो सकी।
लोगों के मुताबिक पहले प्रशासन ने हसनमियां कदीरी को समर्थकों के साथ 12 बजे के बाद दूसरे रास्ते से सुरक्षा के बीच जुलूस निकलवाने की बात कही थी। लेकिन 12 बजे के बाद जैसे ही हसनमियां तकरीर के बाद अकीदतमंदों से जुलूस के लिए तैयार हो जाने का आह्वान कर मंच से उतर आगे बढ़े वैसे ही एएसपी सुधीर कुमार की अगुवाई में वहां मौजूद भारी पुलिस बल ने उनका रास्ता रोक लिया।
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आरोप है कि उन्होंने व उनके समर्थकों ने जब इसका विरोध किया तो पुलिस ने लाठियां बरसानी शुरू कर दी। इससे भगदड़ मच गई। विरोध में मोहल्ले के लोगों ने भी पथराव शुरू कर दिया। इस पर पुलिस व पीएसी के जवानों ने जवाब में पथराव व आसूं गैस के गोले दागने शुरू कर दिए। इसी बीच दोनों ओर से फायरिंग भी शुरू हो गई। करीब आधा घंटा तक हुए इस बवाल में मोहल्ले के 14 वर्षीय किशोर समीर खां, 22 वर्षीय कदीर और 22 वर्षीय सैयद वसीम गोली लगने से घायल हो गए। इन तीनों को रात में ही जिला अस्पताल ले जाया गया जहां हालत गंभीर होने पर बरेली रेफर कर दिया गया।
इसके अलावा सिर और पैर में पत्थर लगने से एएसपी सुधीर कुमार सिंह सहित पुलिस के चार सिपाही क्रमश: सुनील कुमार, वीरेंद्र कुमार, सत्यवीर कौशिक, रामदूत अग्निहोत्री व पीएसी के जवान क्रमश: ब्रजेश व शम्भूनाथ घायल हो गए। वहीं विक्की (21) पुत्र शमशाद, सिजान (14) पुत्र यामीन, लालू (20) पुत्र साजिद अली, शारुक (19) पुत्र हारुन,  हनीफ अंसारी (40) व पत्रकार तारिक नैयर घायल हो गए। मोहल्लेवालों के मुताबिक और भी कई लोग घायल हुए हैं।
सूचना पर मौके पर पहुंचे डीएम मासूम अली सरवर व एसपी जवाहर ने हालात का जायजा लिया और उपद्रव के कारण सुरक्षा के लिहाज से मस्जिद व आसपास के घरों में पनाह लिए लोगों को एनाउंस कर घर भिजवाया। घटना के बाद शहर से तनाव है। इसे देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने घटना स्थल एवं आसपास के मोहल्लों में काफी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिए गए हैं।
गुरुवार की सुबह डीआईजी आरकेएस राठौर भी पीलीभीत पहुंच गए और घटना की जानकारी ली। दूसरी ओर सुनगढ़ी इंस्पेक्टर बृजेश सिंह की ओर से मौलाना हसन मियां कदीरी, उनके दो भाई अयूब कदीरी व इरफान कदीरी सहित 10 नामजद और 600-700 अज्ञात के खिलाफ हत्या के प्रयास, बलवा, सामाजिक सौहार्द बिगड़ाने, सरकारी आदेश का उल्लंघन करने सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने रात में ही उपद्रव के दौरान लिए गए वीडियो क्लिप के आधार पर एक व्यक्ति को हिरासत में लिया था। इसके अलावा कुछ अन्य लोगोें को भी हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की बात कही जा रही है।

प्रशासन ने जरताब रजा का जुलूस निकाले जाने की अनुमति दी थी। हसनमियां कदीरी व उनके समर्थकों को जुलूस निकालने की अनुमति नहीं थी। हसनमियां कदीरी को स्थिति से अवगत करा दिया था। इसके बाद भी वह व उनके समर्थक जबरिया जुलूस निकालने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें रोका गया तो सभी पुलिस पर हमलावर हो गए। जिन्हें रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। फायरिंग पब्लिक की ओर से की गई है। पुलिस ने कोई फायरिंग नहीं की।
- सुधीर कुमार, एएसपी


एएसपी ने पहले 12 बजे के बाद जुलूस निकालने को कहा था। सभी लोग शांत ढंग से मद्दे की पुलिया के पास एकत्र थे। प्रशासन के वादे के मुताबिक 12 बजे के बाद से सभी लोग हाथ में धार्मिक झंडे लेकर जुलूस निकालने को तैयार ही हुए थे कि एएसपी के कहने पर पुलिस ने ताबड़तोड़ लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। जान बचा लोग पड़ोस की मजार व मस्जिद में घुसे तो पीएसी के जवानों ने वहां भी पथराव किया। फिर पुलिस फायरिंग करने लगी। न बच्चों को देखा न महिलाओं व बुजुर्गों को।
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- मौलाना हसनमियां कदीरी
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