गोकशी की बढ़ती घटनाओं के बाद धरपकड़ कर जेल भेजे गए छह आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एडवाइजरी बोर्ड में डीएम-एसपी की पेशी के बाद हुई सुनवाई में सभी को रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) में निरुद्ध कर दिया गया है।
अगस्त और सितंबर माह में बरखेड़ा क्षेत्र में गोकशी की वारदातों में इजाफा हुआ था। इसको लेकर ग्रामीणों और हिंयुवा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन भी किए थे। आए दिन खेतों में गोवंशीय पशुओं के अवशेष मिलने से स्थानीय लोगों में आक्रोश दिखाई दिया था। जिसके बाद एसपी ने खुद कमान संभाली तो न सिर्फ आरोपी हत्थे चढ़, बल्कि इस पूरे खेल में पुलिस की मिलीभगत भी उजागर हुई थी। तीन पुलिसकर्मियों पर भी विभागीय कार्रवाई की गई थी। बरखेड़ा थाना पुलिस ने छह आरोपी रहीश अहमद, शमसुल, गुलाम नवी, विशाल अहमद, शकील, मोहम्मद अली को जेल भेज दिया था। वहीं इनके खिलाफ रासुका के तहत शिकंजा कसने को कार्रवाई की गई थी। सोमवार को डीएम डॉ.अखिलेश कुमार मिश्र, एसपी बालेंदु भूषण सिंह को हाईकोर्ट के एडवाइजरी बोर्ड में तलब किया गया था। वहां दोनों अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। जिसके बाद अब आरोपियों पर शिकंजा कसा जा सका है। एसपी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि एडवाइजरी बोर्ड में सुनवाई के बाद सभी को रासुका में निरुद्घ कर दिया गया है। बुलंदशहर कांड के बाद अब गोकशी को लेकर पहले से भी अधिक सख्ती करने के निर्देश थानाध्यक्षों को दे दिए गए हैं। जिन इलाकों में बड़े पैमाने पर गोकशी की शिकायतें रहती है, वहां खुद अफसर कमान संभालेंगे। इसकी पूरी रणनीति बनाकर कार्रवाई कराई जाएगी।