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नवजात की मौत पर धरने पर बैठा परिवार, कार्रवाई की मांग
तीन घंटे बाद कोतवाल के आश्वासन पर माने, विधायक ने भी बंधाया ढांढस
पिता ने पुलिस को दी नामजद तहरीर, रिपोर्ट दर्ज नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। नवजात की इलाज के दौरान मौत के बाद जिला महिला अस्पताल गेट पर परिवारीजन धरने पर बैठ गए। चिकित्सक की लापरवाही और गलत इलाज से बच्चे की मौत का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। करीब तीन घंटे बाद कोतवाल ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया, तो धरना समाप्त किया जा सका। पिता ने मामले में नामजद तहरीर पुलिस को दी है। इसके बाद पुलिस ने मासूम का शव पोस्टमार्टम को भेज दिया है।
न्यूरिया थाना क्षेत्र के मेवातपुर गांव निवासी उमेश ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उन्होंने तीन अक्तूबर को पत्नी हेमलता को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल भर्ती कराया था। शाम करीब पौने आठ बजे उसने एक बेटे को जन्म दिया। इस दौरान बच्चे का स्वास्थ्य सही बताया गया था। दूसरे दिन चार अक्तूबर को चिकित्सक द्वारा बच्चे को एक टीका लगाया गया। जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। टीका लगाने वाली जगह पर बच्चे को एक गांठ बन गई, जिससे रक्तस्त्राव होने लगा। इस पर महिला अस्पताल के एक अन्य चिकित्सक को बताया गया, तो उन्होंने कहा कि बच्चा लगाए गए टीके को सहन नहीं कर सका है। कुछ देर में सब ठीक होने की बात कहकर दोबारा इलाज शुरू कर दिया। इसके बाद से परिवारीजनों को बच्चे के पास नहीं जाने दिया। यही नहीं परिवारीजनों ने बच्चे को डिस्चार्ज करने के लिए कहा गया ताकि उसको कहीं प्राइवेट में दिखाया जा सके, इस पर भी अस्पताल स्टाफ इनकार करता रहा। बच्चा परिवारीजनों को नहीं दिया जा रहा था। बाद में काफी हंगामा होने पर बच्चे को मृत बता दिया। अस्पताल स्टाफ की लापरवाही से मौत का आरोप लगाते हुए परिवारीजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होने अस्पताल आए विधायक संजय सिंह गंगवार, प्रधान दहगला जसपाल सिंह मौके पर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया। विधायक प्रतिनिधि के तौर पर जसपाल सिंह कार्रवाई होने तक परिवार के साथ रहे। इधर, कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर महिला अस्पताल गेट पर परिवार धरने पर बैठ गया। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने तक पोस्टमार्टम न कराने की मांग शुरू कर दी। तीन घंटे तक कोतवाली पुलिस असहज बनी खड़ी रही, लेकिन परिवार को समझाया भी नहीं जा सका। अफसर अपराध समीक्षा बैठक में व्यस्त रहे। बाद में कोतवाल केपी सिंह के पहुंचने पर परिवार शांत हुआ और शव को पीएम के लिए भेज दिया गया है।
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सात अक्तूबर को भी हुआ था हंगामा
इसी बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर सात अक्तूबर को जिला महिला अस्पताल में हंगामा हुआ था। परिवारीजनों को बच्चा न दिखाने की बात पर कहासुनी हो गई थी। बाद में पुलिस ने चिकित्सक की तहरीर बच्चे के पिता समेत चार के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने की रिपोर्ट दर्ज की थी।
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बच्चे के पिता की ओर से तहरीर दी गई है। मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पीएम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
- धर्म सिंह मार्छाल, सीओ सिटी
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वर्जन
बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसको तीन दिन पहले ही रेफर कर दिया गया था। इसके बाद भी परिवार वाले उसको नहीं ले जा रहे थे। अस्पताल के कर्मचारी की कोई लापरवाही नहीं है। बच्चे की मौत के बाद परिवार की ओर से लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। - डॉ. पुष्पा पंत, प्रभारी सीएमएस ( जिला महिला अस्पताल)
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पिता ने चिकित्सक समेत तीन के खिलाफ दी तहरीर
पीलीभीत। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गजरौला में प्रसव के कुछ देर बाद प्रसूता की मौत के मामले में दूसरे दिन मृतका के पिता ने चिकित्सक समेत तीन के खिलाफ तहरीर पुलिस को दी है। हालांकि इस पर अभी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। गजरौला थाना क्षेत्र के तकिया गांव निवासी 25 वर्षीय मायादेवी पत्नी देवपाल ने मंगलवार दोपहर करीब सवा बजे गजरौला पीएचसी में एक बच्चे को जन्म दिया था। इसके कुछ ही देर बाद प्रसूता की मौत हो गई थी। परिवारीजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। इस मामले में विवाहिता के पिता रामदुलारे निवासी पिपरिया नवदिया ने पीएचसी की चिकित्सक समेत तीन के खिलाफ तहरीर पुलिस को दी है। जिसपर पुलिस ने दूसरे दिन बुधवार को शव पोस्टमार्टम को भेज दिया है। अग्रिम कार्रवाई के लिए पीएम रिपोर्ट का इंतजार पुलिस कर रही है।