टाइगर रिजर्व की वन भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है। गांव वीरखेड़ा के निकट हुई पैमाइश के बाद 225 एकड़ वन भूमि पर गेहूं की लहलहाती फसल पाई गई है। राजस्व विभाग व वन विभाग के संयुक्त सीमांकन के बाद इस अवैध कब्जे की पुष्टि हुई है। सीमांकन के वन महकमे ने अपनी भूमि पर पिलर लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। इसके चलते अवैध कब्जेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।
कलीनगर तहसील के वीरखेड़ा खजुरिया में 1892 एकड़ भूमि भूदान समिति के अलावा इसमें 1005 एकड़ वन भूमि भी है। मौके पर 225 एकड़ वन भूमि अवैध कब्जेदारों के कब्जे में है। सूत्र बताते हैं कि इस अवैध कब्जे के जिम्मेदार भी वन विभाग ही है। बताया जाता है कि राजस्व विभाग व वन विभाग का संयुक्त सीमांकन न होने का फायदा उठा कर करीब चार दशक पहले से कई ग्रामीण वन विभाग की भूमि पर धीरे-धीरे कब्जा करते रहे। चार माह पहले ही में टाइगर रिजर्व प्रशासन इसके प्रति चेता। वन विभाग ने जब अवैध कब्जेदारों को बेदखल करना चाहा तो उन्होंने संबंधित भूमि अपनी बता विरोध किया। साथ ही प्रशासन को भी इस आशय का एक पत्र भेजा। इसके बाद टाईगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश ने डीएम शीतल वर्मा ने से मिलकर उक्त भूमि का संयुक्त सीमांकन कराने का आग्रह किया था। डीएम के निर्देश पर करीब तीन माह माह पूर्व यह सीमांकन कार्य तत्कालीन एसडीएम सूरज यादव के कार्यकाल में शुरू हुआ था। इस सीमांकन कार्य में वन विभाग ने अपनी टीमें भी लगाई। वन विभाग के अपनी 1005 एकड़ भूमि पूरी करनी थी। इसके चलते राजस्व व वन विभाग द्वारा संयुक्त सीमांकन कार्य शुरू किया गया। इस बीच भूदान समिति के लोगों ने भी अपनी भूमि कम बताकर पैमाइश कराकर कब्जा दिलाने की मांग की थी, लेकिन निकाय चुनाव होने के चलते सीमांकन कार्य बीच में ही रोक दिया गया था। निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद सीमांकन कार्य पुन: शुरू किया गया, लेकिन सीमांकन कार्य काफी धीमी गति से चला। इस पर वन महकमे ने आला अफसरों ने डीएम से मिलकर उन्हें स्थिति से अवगत कराया। डीएम ने कलीनगर एसडीएम पुष्पा देवरार को मौके पर जाकर सीमांकन कार्य जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए। करीब चार दिन पूर्व एसडीएम पुष्पा देवरार व डीएफओ कैलाश प्रकाश ने मौके पर पहुंचकर सीमांकन कार्य का जायजा लिया और दो दिन के भीतर सीमांकन कार्य पूरा कराने करने के निर्देश दिए।
इसके बाद राजस्व व वन महकमे द्वारा सीमांकन कार्य एक दिन पहले पूरा कर लिया। सीमांकन के दौरान बड़े पैमाने पर वन भूमि अवैध कब्जेदारों के कब्जे में निकली। मौजूदा समय में इस भूमि पर अवैध कब्जेदारों की गेहूं की फसलें लहलहा रही हैं। वन महकमे के मुताबिक करीब 225 एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जेदारों का कब्जा है। इधर सीमांकन पूरा होनेे के बाद वन महकमे ने उक्त भूमि पर सीमा पिलर लगाने का कार्य शुरू कर दिया। जिसके चलते अवैध कब्जेदारों में हड़कंप मचा है। हालांकि जिन लोगों के कब्जे में यह भूमि निकल रही है उनका कहना हैं कि अभी दूसरे क्षेत्र में भी वन भूमि पर अवैध कब्जे हैं। आरोप है कि वन महकमा उन अवैध कब्जेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है और न ही वहां पिलर लगाए जा रहे हैं। गांव निवासी सुखलाल का कहना है कि भूदान योजना में गांव के प्रत्येक परिवार को 6.58 एकड़ भूमि मिली थी। प्रशासन से उन लोगों ने अपनी भूमि की पैमाइश कराने की मांग की थी। प्रशासन ने पैमाइश कर वन भूमि तो निकाल दी, लेकिन उन लोगों की भूमि कहा है यह अभी तक नहीं बताया। उन्होंने कहा कि जब तक राजस्व प्रशासन उन लोगों की जमीन की पैमाइश कर उन्हें नहीं सौंप देता तब तक सीमांकन की गई भूमि को वन विभाग की बताना किसी भी दशा में उचित नहीं है।
वीरखेड़ा में वन व राजस्व विभाग का संयुक्त सीमांकन कार्य पूरा हो गया है। वन विभाग को उनकी पूरी जमीन माप कर दे दी गई है। सीमांकप के दौरान करीब 225 एकड़ भूमि पर गेहूं की फसलें खड़ी होना पाई गई हैं। ब्रिजेंद्र राना, राजस्व निरीक्षक