पीलीभीत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के तहत गांव-गांव कराए जाने वाले नुक्कड़ नाटक आदि कार्यक्रम के नाम पर करोड़ों का भुगतान की कोशिश नाकाम होने पर भले ही फर्जीवाड़ा करने वाली दोनों फर्में अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो सकी, लेकिन अब इनके कारनामों की परतें खुलने लगी है। ई-टेंडरिंग प्रक्रिया पूर्ण होने से पहले ही फर्मों ने खेल करना शुरू कर दिया था। दिसंबर और जनवरी माह में गांवों में कराए जाने वाले कार्यक्रमों की सीडी फर्जी तरीके से तैयार कर उपलब्ध कराई गई थी।
स्वच्छ भारत मिशन के प्रचार-प्रसार के नाम पर अफसरों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये ठिकाने में जुटी फर्मों के फर्जीवाड़े की परतें तत्कालीन डीएम के जाते ही खुलना शुरू हो गई है। इससे विभागीय अफसरों की टेंशन बढ़ी है। वही सूत्रों की मानें तो यह भी पता चला है कि दिसंबर और जनवरी माह में गांव में कराए जाने वाले नुक्कड़ नाटक आदि कार्यक्रमों की टेंडरिंग प्रक्रिया पूर्ण होने से पहले ही खेल शुरू कर दिया गया था। नवंबर में कराए गए कार्यों को दिसंबर में कराना दर्शाकर इसकी सीडी व बिल देकर लाखों रुपये का भुगतान लेने की कोशिश की गई थी। उच्च स्तर पर हुई शिकायत के बाद तत्कालीन डीएम डॉ. अखिलेश मिश्रा ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की। तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. अर्चना द्विवेदी ने फरवरी माह में इस मामले में फर्म मालिक समेत कई के बयान लिए गए, लेकिन बाद में जिले के एक बड़े से अधिकारी के संबंधी से जुड़ा मामला होने पर दबा दिया गया।
जिले में रहे एक प्रशासनिक अफसर के करीबी की बताई जाती है फर्म
विभागीय सूत्रों की मानें तो अफसरों की सांठगांठ से स्वच्छ भारत मिशन के तहत कराए जाने वाले कार्यों में पूर्व में भी लाखों रुपये की घपलेबाजी की गई थी। इस मामले में कहा जाता है कि ये फर्म जिले में तैनात रहे एक प्रशासनिक अफसर के करीबी की है। जिस वजह से कार्रवाई नहीं होती। यह भी दावा किया जा रहा कि टेंडर के लिए पांच फर्मों ने आवेदन किया जिसमें तीन फर्म इसी युवक की हैं।
इस मामले में डीपीआरओ से जानकारी जुटाई गई है। मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई थी। इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वैभव श्रीवास्तव, डीएम