पूरनपुर (पीलीभीत)।
खुद को पूरनपुर का निवासी बताकर दो फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने के मामले में लापरवाही बरतने वालों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। सिर्फ दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर लापरवाही बरतने वाले अन्य कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है, जबकि स्कूल से जारी की गई मार्कशीट और एसडीएम कार्यालय से बना निवास प्रमाण पत्र दोनों फर्जी साबित हो गए थे।
खुद को गांव शेरपुर मकरंदपुर निवासी सुरजीत सिंह और मोहल्ला गनेशगंज निवासी परमजीत सिंह बताकर दो युवकों ने माह जुलाई और अगस्त में पासपोर्ट बनवाए थे, जो दोनों न सिर्फ फर्जी साबित हुए बल्कि इनके तार पंजाब के बहुचर्चित नाभा जेल ब्रेक कांड से जुड़े निकले। पंजाब में एक आतंकी के पास से पीलीभीत से बना सुरजीत का पासपोर्ट बरामद होने पर मामला खुलते ही प्रशासनिक स्तर से गुपचुप तरीके से कार्रवाई शुरू की गई। अफसरों ने आतंकियों से तार जुड़े होने की बात को भले स्वीकार नहीं किया, लेकिन सबसे पहले सुरजीत और परमजीत के नाम पूरनपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया गया, जबकि इस नाम के दिखाए गए पते पर कोई रहता ही नहीं है। पासपोर्ट जांच में लापरवाही बरतने पर एसपी कलानिधि नैथानी ने दो पुलिसकर्मियों को निलंबित भी कर दिया था। उधर अन्य लापरवाह कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी है। फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए माधोटांडा के एक स्कूल से मार्कशीट बनवाई गई। इसके अलावा एसडीएम कार्यालय से दिखाए गए नाम-पते के आधार पर निवास प्रमाण पत्र भी बनवा लिया गया। इसका प्रयोग पासपोर्ट बनवाने में किया गया। अब मामला उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद भी निवास प्रमाण पत्र और मार्कशीट बनवाने को लेकर मदद करने वालों का पता नहीं लगाया जा सका है। पुलिस की रिपोर्ट में यह खुलकर कहा गया कि इसमें कई अन्य लोगों के नाम बतौर मददगार सामने आएंगे। एक अधिवक्ता की कार्यशैली सबसे अहम मांगी गई। वह कनाडा चला गया, उसकी वापसी का इंतजार किया जा रहा है। इसके बावजूद मामले को गोपनीयता का नाम देकर दबाते हुए कार्रवाई नहीं की जा सकी है। अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।