मैगी नूडल्स पर उठे उसके मसाले (टेस्ट मेकर) को लेकर नेस्ले ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। एक जांच में गड़बड़ी मिलने पर एडीएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस पर बृहस्पतिवार को एडीएम ने वितरक एवं नेस्ले कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अधिकारी वीके वर्मा ने करीब दो वर्ष पूर्व शहर मेें ब्रजेश कुमार की दुकान से मैगी का नमूना लेकर जांच को भेजा था। इसकी रिपोर्ट आने पर मैगी के साथ मिलने वाले टेस्ट मेकर में राख की मात्रा मानक से अधिक पाई गई। जिससे मैगी के टेस्ट मेकर पर सवाल उठे थे।
इस रिपोर्ट के आधार पर अधिकारी ने संबंधित व्यापारी एवं कंपनी को नोटिस देने के साथ ही एडीएम कोर्ट में 16 अप्रैल 2016 को मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के दौरान सभी पक्षों को तलब कर सुनवाई की गई थी। बृहस्पतिवार को एडीएम बृजकिशोर ने मामले का फैसला सुनाते हुए कहा था कि इसमें मैगी के टेस्ट मेकर के अधोमानक पाए जाने पर मैगी के वितरक बृजेश कुमार एवं निर्माता कंपनी नेस्ले पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
एडीएम बृजकिशोर ने बताया कि नमूने लेने के दौरान टेस्ट मेकर में राख की मात्रा एक प्रतिशत का मानक निर्धारित था जबकि नमूने की जांच रिपोर्ट में यह दो प्रतिशत तक पाई गई। मानक से अधिक राख की मात्रा मिलने पर जुर्माना लगाया गया।
वहीं अब इस मामले पर नेस्ले इंडिया ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा है कि हमे एड्ज्यूडिकेशन अधिकारी द्वारा पारित आदेश नहीं मिला है। 'हम अपने ग्राहकों को फिर से विश्वास दिलाते हैं कि मैगी नूडल्स खाने में 100 प्रतिशत सुरक्षित है। हम पूरे विश्वास के साथ बताते हैं कि मैगी नूडल्स के निर्माण की प्रक्रिया के किसी भी चरण में मैगी नूडल्स या टेस्ट मेकर में राख (ऐश) नहीं मिलाई जाती है।'
नेस्ले की माने तो मैगी फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के मानकों पर पूरी तरह खरी उतरती है और मैगी खाने वालों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। कंपनी का कहना है कि जिस मामले को लेकर मीडिया खबरे दिखा रहा है वो काफी पुराना है।