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दबिश के नाम पर सिर्फ औपचारिकता

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पीलीभीत। सिटी डाकघर की जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश करने वाले रसूखदार अपनी ऊंची पहुंच के बल पर खुलेआम घूम रहे हैं। सत्ता का दबाव पुलिस पर काम कर रहा है, अगर ऐसा न होता तो संगीन मामले में पुलिस की कार्रवाई इस तरह से सुस्त न होती। दबिश देने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है।
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कोतवाली क्षेत्र स्थित सिटी डाकघर की साढ़े छह सौ वर्ग गज बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जा करने की नीयत से रसूखदारों ने मंगलवार रात चहारदीवारी तोड़ दी थी। इसकी बुधवार सुबह सूचना मिलने पर पुुलिस ने कार्रवाई की। जहानाबाद नगर पंचायत की चेयरमैन ममता गुप्ता के बेटे शिवा गुप्ता, पूर्व में जिले में तैनात रहे एक बड़े अफसर के भांजे बताए जाने वाले लखनऊ निवासी पारसमणि पांडे समत 13 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई थी। चार को पुलिस जेल भेज चुकी है, लेकिन बाकी फरार हैं। रसूखदारों की अब तक धरपकड़ न किए जाने पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल भी उठने लगे हैं। पुलिस दबिश का दावा कर रही है। गिरफ्तारी के लिए दबाव बनाने की बात भी कह रही है। आरोपियों को जल्द पकड़ भी लिया जाएगा, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। पुलिस की दबिश और दबाव बनाने का पैंतरा भी रसूखदारों के आगे काम नहीं कर रहा है। आमतौर पर जो पुलिस आम आरोपी के न मिलने पर उसके किसी करीबी तक को हिरासत में लेकर कई दिनों तक थाने में बैठाए रहती है, वह इस मामले में आरोपियों के घरवालों से सख्ती से पूछताछ तक नहीं कर रही है। इसके पीछे राजनीतिक दबाव के हावी होने की चर्चाएं हैं। बीते दिनों सोशल साइट्स पर आरोपी शिवा गुप्ता के फोटो अपलोड होने पर पुलिस ने ये अंदेशा तो जता दिया कि वह उत्तराखंड में होगा लेकिन न तो सर्विलांस की मदद ली गई, न ही कोई टीम उसकी तलाश में भेजी गई। नतीजतन रसूखदारों की धरपकड़ के प्रयास के नाम पर मामले को लंबित रखा जा रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि आरोपियों को पैरवी का भी पूरा समय पुलिस दे रही है। पूछने पर सिर्फ दबिश जारी होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जा रहा है। सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल ने बताया कि आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की टीमें लगी हुई हैं। लगातार प्रयास किया जा रहा है।
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