पीलीभीत। निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले जालसाजों पर कानूनी शिकंजा कसने के बजाए पुलिस महकमा लापरवाह बना हुआ है। एसपी से शिकायत किए जाने के बाद भी दूसरे दिन रिपोर्ट नहीं लिखी गई। खास बात यह रही कि थाना पुलिस पूरे मामले को लेकर अनभिज्ञता जताती रही। वहीं अफसरों के पास भी इसका कोई जवाब नहीं मिला।
बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन पहुंचे दर्जनों युवकों ने एसपी से बताया था कि वह नौगवां चौराहा पर कार्यालय बनाकर 2008 से संचालित हो रही एक फाइनेंस कंपनी में बतौर एजेंट काम करते थे। कंपनी को तीन युवक चलाते थे। उन्होंने एजेंट होने के कारण निवेशकों के चार करोड़ से अधिक रुपये कंपनी में जमा कराए। जिनको तय शर्त वापस करने के बजाए कंपनी के संचालक कार्यालय बंद कर गए। इसके बाद से लगातार टालमटोल की जा रही है। आरोपियों के नेपाल भागने की फिराक में होने की आशंका जाहिर करते हुए एजेंटों ने समय रहते कानूनी कार्रवाई करने की मांग की थी। इस पर अफसरों ने भी सख्त कार्रवाई के बयान तो दिए, लेकिन इसका असर आगामी 24 घंटे में दिखाई नहीं दिया। शुक्रवार को मामले में पुलिस बेहद लापरवाह रही। थाना स्तर पर पुलिसकर्मी घटना से ही अनभिज्ञता जता गए, तो अफसरों के पास भी कार्रवाई को लेकर कोई जवाब नहीं था। एक बार फिर ठगी के बड़े मामले में पुलिस की लचर कार्यशैली उजागर हुई। एसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि शिकायत पर थाना स्तर से क्या कार्रवाई की गई? इसके बारे में कोतवाली पुलिस से जानकारी कराई जा रही है।