फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिले में सक्रिय था बरेली का वाहन चोर गिरोह, तीन गिरफ्तार

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। बरेली का आटोलिफ्टर गैंग जिले में बाइक चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने सीसी टीवी फुटेज की मदद से गैंग के तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास चोरी की 20 बाइक बरामद हुईं। इस कामयाबी के लिए एसपी ने टीम को 20 हजार का ईनाम देने की घोषणा की है। पुलिस लाइन सभागार प्रेसवार्ता के दौरान एसपी मनोज कुमार सोनकर ने बताया कि जिले में बाइक चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए एएसपी रोहित मिश्र और सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल के नेतृत्व में पुलिस टीम बनाई गई थी। इसमें स्वाट टीम प्रभारी नरेंद्र यादव और सर्विलांस प्रभारी नरेश कश्यप को लगाया गया। गौहनिया चौराहा के पास एक अस्पताल के बाहर से बाइक चोरी करने वालों के फुटेज सीसीटीवी कैमरे में आ गए थे। इन फुटेज की मदद से बाइक चुराने वाले एक युवक की पहचान हाफिजगंज (बरेली) थाना क्षेत्र के कस्बा सेंथल निवासी अली हसन उर्फ मुन्ना के रुप में हुई। शनिवार रात करीब साढ़े नौ बजे पुलिस को अली हसन, उसके साथी हाफिजगंज (बरेली) के गोल मार्केट निवासी आबिद खां और देवरनियां (बरेली) थाना क्षेत्र के खमड़िया गांव निवासी मोहम्मद नाजिर अंसारी चोरी की गई बाइकों की नौगवां पकड़िया में बिक्री करने की सूचना मिली। इस पर पुलिस टीम ने छापा मारकर नौगवां पकड़िया गांव में ईदगाह के पास से तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस को मौके पर चोरी की पांच बाइकें मिलीं। तीनों से पूछताछ करने के बाद उनकी निशानदेही पर अलग-अलग स्थानों से चोरी 15 बाइक और बरामद हुईं। पूछताछ के दौरान इस गैंग में जहानाबाद थाना क्षेत्र के निसरा गांव निवासी रईस अहमद और अमखिड़िया गांव निवासी नईम रजा के शामिल होने का भी पता चला, जिन्हें पुलिस तलाश रही है।
विज्ञापन

तीन से पांच हजार में बेचते थे चोरी की बाइक
पुलिस के अनुसार पकड़े गए आरोपी अस्पतालों और बरातघरों के आसपास ज्यादा सक्रिय रहते थे, जो स्टैंड से अलग खड़ी करने वाले की बाइक उड़ा देते थे। आरोपियों के पास से एक मास्टर चाबी भी मिली है, जिससे अधिकांश बाइक का ताला खुल जाता है। गैंग के सदस्य ग्राहक तलाशने के बाद चोरी की बाइक तीन से पांच हजार रुपये में बेच दिया करते थे। बेचने से पहले बाइक का चेसिस नंबर अलग कर देते थे। जो बाइक नहीं बिक पाती उसे कटवाने के बाद पुर्जों बेचे देते थे। बरामद बाइकों के चेसिस नंबर के आधार पर पुलिस गाड़ी मालिकों का पता लगने में जुटी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें