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18 साल पुराने हत्याकांड के आरोपी को उम्रकैद, जुर्माना

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18 साल पुराने हत्याकांड के आरोपी को उम्रकैद, जुर्माना
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क्रासर...
अरविंदर सिंह की हुई थी मौत
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश अभय प्रताप सिंह ने 18 वर्ष पूर्व हुए अरविंदर सिंह हत्याकांड के आरोपी को दोषी पाकर आजीवन कारावास और तीस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड वसूल होने पर इस मामले में घायल हुए ज्ञान सिंह व जागीर सिंह को दस हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रुप में मिलेंगे।
थाना गजरौला के गांव पिपरिया करम निवासी ज्ञान सिंह ने तीन जुलाई 2000 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने पुत्र अरविंदर सिंह के साथ खेत पर थे। खेत पर ही परिवार के जागीर सिंह ट्रैक्टर से खेत जोत रहे थे। दिन में पांच बजे गांव का ही तरसेम सिंह हाथ में दुनाली लाइसेंसी बंदूक लेकर खेत पर आया और मुकदमे की रंजिश को लेकर जान से मारने की नियत से फायरिंग शुरू कर दी। दो फायर अरविंदर सिंह के सीने व चेहरे पर लगे और उसकी मौत हो गई। वादी के दोनों पैरों में घुटने से नीचे फायर लगे। जागीर सिंह के भी फायर लग गए थे। मौके पर सुरेंद्र सिंह, लखविंदर सिंह आदि आए। उन लोगों ने घटना देखी, तब आरोपी फायरिंग करता भाग गया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बाद घायलों का चिकित्सीय परीक्षण कराया। मृतक का पोस्टमार्टम कराया गया। मामले की सुनवाई के बाद त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश अभय प्रताप सिंह ने तरसेम सिंह को दोषी पाकर आजीवन कारावास, 30 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। सरकार की ओर से पैरवी कर रहे काजी रिफाकत हुसैन फरहान ने बताया कि अर्थदंड वसूल होने पर घायल ज्ञान सिंह व जागीर सिंह को दस हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रुप में मिलेंगे।
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14 साल फरार रहा था अरविंदर हत्याकांड का आरोपी तरसेम सिंह
पुलिस से बचने को अज्ञात शव का तरसेम के नाम से परिवार ने कर दिया था अंतिम संस्कार
पीलीभीत। गांव पिपरिया करम के अठारह साल पुराने अरविंदर सिंह हत्याकांड का आरोपी तरसेम सिंह घटना के बाद जेल चला गया था। न्यायालय में हाईकोर्ट का फर्जी जमानत आदेश दाखिल कराकर उसे जेल से रिहा करा दिया गया था। फर्जी बेल आर्डर का खुलासा होने पर तरसेम पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। यह मामला अभी भी विचाराधीन है। फर्जी बेल आर्डर में जेल से निकलने के बाद तरसेम करीब चौदह साल बाद पुलिस की पकड़ में आया था।
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सेवानिवृत्त फौजी तरसेम सिंह ने जेल से फर्जी आर्डर से रिहाई के बाद दोबारा जेल जाने से बचने को पीलीभीत जिला छोड़ दिया था। वह हरियाणा में रहने लगा था। वहां वह पशु आहार फैक्ट्री चलाता था। उस पर पांच हजार का इनाम भी पुलिस ने घोषित किया था। तरसेम ने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए थाना गजरौला क्षेत्र में कई साल पहले दो ट्रक चालकों के बीच आपसी विवाद में हुई एक हत्या के मामले में अपनी पत्नी को भेजकर शव की शिनाख्त तरसेम सिंह के रुप में करा ली थी। पोस्टमार्टम के बाद पत्नी और परिवारवालों ने उस शव को पुलिस से लेकर अंतिम संस्कार भी तरसेम के रुप में कर दिया था। तरसेम ने सोचा था कि अब पुलिस उसकी मौत सच में मानकर उसकी तलाश बंद कर देगी। बाद में पंजाब के जिस ट्रक चालक की हत्या हुई थी, उसके परिवारवालों ने खोजबीन की तो खुलासा हुआ कि शव तरसेम का नहीं था। हत्या के मामले में करीब चौदह साल फरार रहने के बाद गजरौला पुलिस ने तरसेम को हरियाणा से गिरफ्तार किया था और 16 मई 2015 को जेल भेजा था। इसके बाद से वह जेल में है। इस मामले में सजा सुनाने के बाद उसे सजा भुगतने को फिर जेल भेज दिया गया। ब्यूरो
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