पीलीभीत। चोरी, लूट समेत अन्य आपराधिक घटनाओं में तो पुलिस की ओर से नाकामी छिपाने को एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाने का खेल जगजाहिर है। उसी तर्ज पर हत्या जैसे संगीन मामले में भी पुलिस की करनी नहीं बदली। पिछले साल बरखेड़ा थाना क्षेत्र में हुई बुजुर्ग किसान की हत्या के मामले में पोस्टमार्टम में हत्या की पुष्टि होने के बाद पहले 45 दिन तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। फिर अफसरों के दबाव में दर्ज की गई एफआईआर में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है। खास बात है कि चार माह पहले पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने की बात कहकर मामला रफा-दफा कर दिया और पीड़ित न्याय की आस लगाए बैठा रह गया। उसे तो इसकी जानकारी ही नहीं थी।
बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गंगापुरी गांव निवासी 56 वर्षीय किसान जानकी प्रसाद पुत्र डोरीलाल 17 अप्रैल 2020 की सुबह छह बजे दवा लाने की बात कहकर घर से निकले थे और लापता हो गए थे। देर शाम तक बुजुर्ग के वापस न आने पर बेटे श्रीपाल ने तलाश की। फिर दूसरे दिन 18 अप्रैल को बरखेड़ा थाने में पिता की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। तीन दिन बाद 21 अप्रैल को लापता किसान का शव गांव पचपेड़ा पुखा में चेतराम के खेत में क्षतविक्षत हालत में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर आई चोटों से मौत होने की पुष्टि हुई तो मामला हत्या का निकला था। परिजन एफआईआर को चक्कर लगाते रहे, मगर तत्कालीन थाना प्रभारी उमेश सिंह सोलंकी 45 दिन तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट दबाए रहे।
अमर उजाला ने सात जून को इस मामले में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। जिसका संज्ञान लेकर तत्कालीन एसपी अभिषेक दीक्षित ने सीओ से जांच कराई और फिर फजीहत से बचने को थाना प्रभारी को हटाकर विभागीय दंड देने की बात कही थी। सात जून को मृतक के बेटे श्रीपाल की ओर से अज्ञात पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी। थाना प्रभारी पर हुई कार्रवाई के बाद भी इस मामले में पुलिस लापरवाह बनी रही। विवेचक बदलते गए और नतीजा शून्य ही रहा। छानबीन के नाम पर थाना पुलिस मामले को ठंडे बस्ते में डाल गई। नतीजतन वही हुआ, जिसका अंदेशा पीड़ित ने भी कई बार जताते हुए अधिकारियों से गुहार लगाई थी। 11 फरवरी 2021 को विवेचक तत्कालीन थाना प्रभारी बरखेड़ा वीरेश कुमार ने साक्ष्य न मिलने का हवाला देते हुए फाइनल रिपोर्ट लगाकर कर्तव्यों से इतिश्री कर ली। अब चार माह बाद पुलिस का खेल उजागर हुआ तो मृतक का परिवार भी दंग रह गया है। फिलहाल पुलिस ने तो हत्या का लंबित मामला निपटाकर आंकड़े दुरुस्त कर लिए, मगर बुजुर्ग किसान की मौत रहस्य बनकर रह गई है।
किसान जानकी प्रसाद की हत्या के मामले में दर्ज रिपोर्ट में 11 फरवरी को ही तत्कालीन थाना प्रभारी की ओर से फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी। उसमें पर्याप्त साक्ष्य न मिलने की बात कही गई है। मेरे कार्यकाल में कोई कार्रवाई इस मामले में नहीं हुई है। - केके शर्मा, थाना प्रभारी बरखेड़ा
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। फाइनल रिपोर्ट भी मेरे कार्यभार ग्रहण करने से पहले ही लगाई जा चुकी है। यह पता किया जाएगा कि एफआर कोर्ट जा चुकी है या नहीं। परिवार के सदस्यों से कोई शिकायत मिलती है तो आगे हरसंभव नियमानुसार कदम उठाएंगे। - किरीट कुमार, एसपी
हमसे तो पुलिस कहती रही छानबीन चल रही है
पिता का शव मिलने के बाद से ही कार्रवाई को भटकते रहे। पहले रिपोर्ट नहीं लिखी जा रही थी। फिर बाद में कुछ लोगों के नाम आरोपी के तौर पर शामिल करने को दिए गए, उस पर भी जांच नहीं हुई। विवेचक बयान लेने घर भी आए थे, कई बार थाने से लेकर अफसरों तक चक्कर लगाए मगर न्याय नहीं मिला। पुलिस हमें छानबीन जारी होने की बात कहती रही। अधिकारियों से मिलकर दोबारा विवेचना कराऊंगा। - श्रीपाल, मृतक किसान का बेटा