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डेढ़ साल से बिना चिकित्साधिकारी, फार्मासिस्ट और संविदाकर्मी के सहारे इलाज

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गजरौला (पीलीभीत)। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत किसी से छिपी नहीं है। जिला अस्पताल से लेकर जनपद की विभिन्न सीएचसी पर इलाज जैसे-तैसे चल रहा है। इसी तरह से गजरौला पीएचसी केे हालात भी ठीक नहीं है। डेढ़ साल से पीएचसी पर प्रभारी चिकित्साधिकारी की तैनाती ही नहीं है। मरीज जिला अस्पताल या फिर निजी अस्पताल के रेफर कर दिए जाते हैं। फार्मासिस्ट और संविदा कर्मियों के सहारे मरीजों का इलाज कराया रहा है। उसमें भी दिन में अधिकांश समय स्टाफ को तलाशने को मरीज भटकते रहते हैं।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गजरौला मेें डेढ़ साल से प्रभारी चिकित्साधिकारी नहीं है। यहां पर एक संविदा डॉक्टर, फार्मासिस्ट, एक वार्ड ब्वॉय, सफाईकर्मी तैनात है। अधिकांश समय स्टाफ नदारद रहता है। मरीज पहुंचते और फिर इलाज के लिए परेशान होते हैं। प्रतिदिन करीब 50 मरीजों की ओपीडी है। उन्हें भी न तो डॉक्टर का परामर्श मिल पाता है, न ही दवाएं। खांसी, जुकाम, बुखार, दाद खुजली जैसी सामान्य मर्ज की दवा भी पर्याप्त नहीं मिल पाती। बताते हैं कि संविदा डॉक्टर मनमर्जी से आती है। अन्य स्टाफ का हाल भी ऐसा ही है। प्रसव की सुविधा भी सीएचसी पर है। इसके लिए तीन संविदा नर्स, एक एएनएम की तैनाती है। मगर अधिकांश केस या तो निजी अस्पताल जाते हैं, या फिर रेफर कर दिए जाते हैं। जिम्मेदार स्टाफ कमी की बात कहकर बचाव करते हैं। वहीं सुबह 10 से शाम चार बजे तक मरीज देखे जाने के नियम का हवाला देकर साख बचाई जाती है।
लंबे समय से डॉक्टर की कोई तैनाती पीएचसी पर नहीं है। दवाएं भी नहीं मिल पाती है। अव्यवस्थाएं दूर हो या फिर पीएचसी को ही बंद कर दिया जाए। - गुरवीर सिंह, ग्रामीण
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सुविधाएं और स्टाफ बढ़ाने पर कोई काम नहीं होता। सामान्य इलाज की भी व्यवस्था नहीं है। घायलों का मेडिकल परीक्षण तक नहीं हो पाता है। हल्की सी बीमारी में भी मुख्यालय दौड़ लगानी पड़ती है। - पंकज गुप्ता, ग्रामीण
पीएचसी तो नाम की है। इसे तो रेफर सेंटर कहना चाहिए। जो भी मरीज जाता है, पीलीभीत भेज दिया जाता है। कई की तो रास्ते में ही जान चली जाती है। प्राथमिक इलाज की भी सुविधा नहीं है। - वेदप्रकाश, ग्रामीण
हाईवे से सटा इलाका होने की वजह से सड़क हादसों की संख्या अधिक है। इसके मरीज भेजे जाते हैं, मगर उन्हें तो गेट से ही अधिकांश बार रेफर कर देते हैं। कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है। व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए। - गुरमीत सिंह ढिल्लों- ग्रामीण
डॉक्टरों की कमी चल रही है। इसे पूरा कराने के लिए कई बार पत्राचार भी किया जा चुका है। संविदा पर स्टाफ लगाकर व्यवस्थाएं सुचारु कराई गई है। इसे लेकर लगातार प्रयास चल रहे हैं। कोई दिक्कत आने पर उसे तत्काल दिखवाते हैं। - डॉ .सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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