पीलीभीत। चर्चित ग्राम विकास अधिकारी पर अपात्र को दो बार आवास देने और अधिकारियों को अभिलेख मुहैया न कराने के आरोप जांच में सही पाए गए। अब आरोपी ग्राम विकास अधिकारी से 2.43 लाख रुपये की वसूली की जाएगी। यह रकम आरोपी ग्राम विकास अधिकारी के वेतन से 25 किश्तों में वसूल की जाएगी। आरोपी पर करीब दो साल पहले शारदा पार इलाके में प्रधानमंत्री आवास और शौचालय के नाम पर सवा दो करोड़ का घोटाला करने का आरोप लगा था, जिसमें एफआईआर भी दर्ज हुई थी।
करीब दो साल पहले पूरनपुर ब्लॉक के शारदापार इलाके में करीब पांच सौ प्रधानमंत्री आवास और शौचालय के नाम पर करोड़ों का घोटाला किया गया था। इस मामले में ग्राम विकास अधिकारी विवेक वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शासन स्तर से इसकी विजिलेंस जांच भी कराई गई थी। इस पर आरोपी ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित किया गया था, लेकिन कुछ दिन बाद ही दोबारा बहाल कर दिया गया था। इसके बाद आरोपी ग्राम विकास अधिकारी की दोबारा शिकायत हुई। आरोप लगा कि ग्राम विकास अधिकारी ने माधोटांडा क्षेत्र की एक महिला के नाम पर गलत तरीके से दो बार आवास आवंटित कर दिया। आवास की रकम भी खाते में भिजवा दी गई थी। इसके अलावा ग्राम पंचायत बराही की एक महिला को अपात्र होने के बावजूद आवास दे दिया गया। अधिकारियों के निर्देश पर इन दोनों मामलों की जांच की गई। आरोप है कि जांच के दौरान आरोपी ग्राम विकास अधिकारी न तो खुद उपस्थिति हुए, और न ही आवश्यक अभिलेख मुहैया कराए गए। पूरनपुर बीडीओ ने अपनी आख्या रिपोर्ट बनाकर आला अफसरों को भेजी थी। इसके बाद डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक ने इस मामले की जांच की। उनकी जांच में ग्राम विकास अधिकारी विवेक वर्मा दोषी पाए गए। अब उनके वेतन से 2,43125 रुपये की वसूली करने के आदेश दिए गए हैं। यह धनराशि वेतन से 25 किश्तों में जनवरी 2021 के वेतन से वसूल जाएगी। इसके अलावा प्रतिकूल प्रविष्टि भी दी गई है। डीडीओ ने बताया कि ग्राम विकास अधिकारी के दोषी पाए जाने पर रिकवरी के आदेश किए गए हैं।