फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गरीब महिलाएं दरकिनार... ठेकेदारों से ले ली यूनिफॉर्म की सप्लाई

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मुफ्त में दी जाने वाली यूनिफॉर्म में कमीशनबाजी का खेल रुक नहीं रहा है। इस बार इसकी सप्लाई बाहरी ठेकेदारों से लेने के बजाय स्वयं सहायता समूह चलाने वाली महिलाओं को प्राथमिकता देने के आदेश थे। इसके बावजूद कोरोना में आर्थिक संकट में जूझ रही गरीब महिलाओं के समूहों के बजाय इस बार भी ठेकेदारों से घटिया यूनिफार्म खरीदकर बच्चों को बांट दी गई। इसमें नीचे से ऊपर तक कमीशन के बांटने का खेल भी चला। बेरोजगार महिलाएं बेसिक शिक्षा विभाग के इस रवैये से मायूस हैं।
विज्ञापन

राष्ट्रीय आजीविका मिशन द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार दिलाने के लिए इस बार परिषदीय स्कूलों के बच्चों की यूनिफॉर्म बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। शासन के निर्देश पर स्वयं सहायता समूहों की सूची भी बेसिक शिक्षा विभाग को सौंपी गई थी। खंड शिक्षा अधिकारियों ने भी स्वयं सहायता समूहों को विद्यालय आवंटित कर दिए थे। समूहों को भी स्कूलों की सूची मुहैया करा दी थी। बेसिक शिक्षा विभाग ने इसके बाद खेल कर दिया। इसमें एक आदेश जारी किया गया कि 15 अगस्त तक स्वयं सहायता समूहों से ड्रेस सप्लाई ले ली जाए। मगर, यह आदेश 25 अगस्त को जारी किया गया, तब तक ठेकेदार स्कूलों को ड्रेस की सप्लाई कर चुके थे। गत माह ही शासन ने कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों को दो सेट यूनिफॉर्म मुहैया कराने के लिए 1,75,570 बच्चों के हिसाब से 75 फीसदी धनराशि यानी 7.90 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा यह धनराशि विद्यालय प्रबंध समिति के खातों में ट्रांसफर कर दी गई थी।
महिला समूह करते रहे इंतजार, स्कूलों में बंट गई यूनिफॉर्म
परिषदीय स्कूलों में चालू माह की शुरूआत में ही मुफ्त यूनिफॉर्म वितरण की प्रक्रिया शुरू करा दी गई। ललौरीखेड़ा ब्लॉक में 32 विद्यालयों के 3707 बच्चों को यूनिफॉर्म देने की जिम्मेदारी ब्लॉक क्षेत्र के ही आठ स्वयं सहायता समूहों को दी गई थी। बताते हैं कि इसे लेकर महिला समूहों ने तैयारी भी कर ली थी, मगर इससे पूर्व ही ब्लॉक के जूनियर हाईस्कूल पट्टी सियाबाड़ी, प्राथमिक विद्यालय भैंसहा चिनौरा, प्राथमिक विद्यालय बालपुर पट्टी, प्राथमिक विद्यालय दौलतगंज, जूनियर हाईस्कूल भूड़ा विक्रमपुर, प्राथमिक विद्यालय खेड़ा, प्राथमिक विद्यालय मीरापुर में बच्चों को नियमों के विपरीत विद्यालय ने अपने स्तर से ठेकेदारों से कमीशन पर यूनिफॉर्म मंगवाकर बांट दी। यह खेल मात्र ललौरीखेड़ा ब्लॉक में ही नहीं बल्कि अन्य सभी ब्लॉकों में भी किया गया। कुछ ब्लॉकों में हालांकि ड्रेस वितरण होना अभी बाकी है।
विज्ञापन

नेताओं के इशारे पर ड्रेस वितरण में खेल
शिक्षा विभाग में माफियाओं की जड़ें बहुत गहरी हैं। उन्होंने शासन की इस योजना पर पहले से ही शिकंजा कस रखा है। ये माफिया कोई और नहीं बल्कि सफेदपोश नेताओं के पाले हुए छुटभैये चेले हैं। वे ड्रेस की सप्लाई में खुद तो कमा ही रहे हैं और नेताजी को भी मोटा कमीशन दे रहे हैं। अफसरों को भी जब कमीशन का लालच मिला तो वे भी नेताओं के सामने समर्पण कर गए। कमीशन के खेल की सेंटिंग होते ही बरेली मंडल के ही एक कस्बे से संपर्क करके कई विद्यालयों में यूनिफॉर्म वितरण शुरू करा दिया गया।
कमीशन में अफसरों से शिक्षक तक शामिल
शासन द्वारा पहली किस्त के रूप में 75 प्रतिशत धनराशि मिली। माफिया खेल की शुरूआत स्कूल में जाकर ही करते हैं। शिक्षक से सेटिंग करके यूनिफॉर्म का रेट तय कर लिया जाता है। इसके लिए 120 या 140 रुपये प्रति जोड़ा ड्रेस खरीद कर बाकी कमीशन खुद खा जाते हैं। कमीशन का एक हिस्सा जिम्मेदार अफसर और नेताओं की जेबों में पहुंचता है। ड्रेस सप्लायरों की कोशिश यही रहती है कि पहली किस्त में मिली धनराशि से सभी बच्चों को दो-दो जोड़ी यूनिफॉर्म दे दी जाए ताकि दूसरी किस्त की रकम वह आसानी से हजम कर सकें।
ईमानदार शिक्षकों को मिलती है धमकी
ऐसा भी नहीं कि सभी शिक्षक कमीशनखोरी कर रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में तमाम ईमानदार छवि के शिक्षक भी हैं, मगर जब वे सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण ड्रेस बांटने की बात करते हैं तो उन्हें धमकी मिलती है। ठेके पर यूनिफॉर्म न लेने पर इन्हें धमकाया जाता है। एक शिक्षक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि उनके स्कूल में किसी नेताजी के दो लोग आए थे। उन्होंने जब ठेके पर बच्चों की यूनिफॉर्म लेने से मना किया तो उनमें से एक ने खुद को एक बड़े नेताजी का आदमी बताते हुए तुरंत ऑर्डर देने की धमकी दी। न देने पर अंजाम भुगतने को कहा।
परिषदीय विद्यालयों में शासन की मंशा के अनुरूप ही यूनिफॉर्म वितरित किए जाने के निर्देश हैं। ललौरीखेड़ा में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से यूनिफार्म न लेकर ठेकेदारों से सीधे सप्लाई लेने की जानकारी नहीं है। हम इस मामले की जानकारी करके सही बात पता लगाएंगे। -मदनलाल वर्मा, प्रभारी बीएसए
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें