पीलीभीत। डीएम के गनर और एसडीएम के पेशकार समेत कई लोगों के भांजे को बेरहमी से पीटे जाने की सूचना मिलने के बाद कार्यकर्ताओं के साथ असम रोड चौकी और बाद में सुनगढ़ी थाने पहुंचे बरखेड़ा विधायक किशनलाल राजपूत काफी गुस्से में नजर आए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि इस मामले में मुख्यमंत्री को भी पीलीभीत बुला लूंगा। सगे भांजे के शरीर पर चोटों के निशान देखकर वह काफी देर तक असम पुलिस चौकी पर हंगामा करते रहे। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी होने तक आरोपी सिपाही को भी थाने नहीं ले जाने दिया। इस दौरान वह जो कहते रहे पुलिस उनकी हां में हां मिलाती रही।
देर रात एएसपी रोहित मिश्र, सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल किसी तरह उन्हें समझा-बुझाकर सिपाही को सुनगढ़ी थाने ले आए। विधायक भी कार्यकर्ताओं के साथ थाने पहुंच गए, पूरी कार्रवाई खुद कराते रहे। एक आरोपी के पिता और भाई माफी मांगने के लिए थाने पहुंचे तो उनको भी विधायक ने भांजे के शरीर पर आई चोटें दिखाकर चुप करा दिया। इधर, विधायक के आगे पुलिस की तो बोलती ही बंद हो गई।
इधर, एएसपी के पूछने पर ऋषभ ने अपने साथ हुई घटना बताई तो उसके आंसू छलक आए।
ऋषभ ने बताया कि जब वह सब्जी लेने के लिए जा रहा था तभी डीएम का गनर और एसडीएम का पेशकार मिल गए। इन लोगों ने उसे बेवजह रोक लिया। इसके बाद सामान और नकदी छीनने लगे। विरोध करने पर पिटाई की। फोन कर अपने साथियों को बुला लिया। फिर कार में डालकर जिला अस्पताल गेट पर ले गए। वहां पर करीब 25 मिनट तक पीटा। कुछ राहगीर बचाने भी आए लेकिन उनको धमकाकर भगा दिया गया। इसके बाद एफसीआई गोदाम के पीछे ले जाकर पीटा और उसको यह धमकी देकर असम पुलिस चौकी ले जा रहे थे कि तमंचा लगवाकर जेल भिजवा देंगे। सभी आरोपी साथ आए थे, लेकिन चौकी के पास पहुंचते ही पुलिस आ गई और फिर बाकी आरोपी कब भाग गए, कुछ पता नहीं लग सका। सिर्फ आरोपी गनर मोहित ही मौके पर रह गया।
विधायक किशनलाल राजपूत के भांजे ऋषभ को अगवा करने के बाद डीएम का गनर और एसडीएम का पेशकार अपने साथियों संग कार में डालकर करीब डेढ़ घंटे तक घूमते रहे। इस दौरान कई जगह कार से उतारकर उसे बेरहमी से पीटा गया। ऋषभ के शरीर पर आए चोटों के निशान देखकर ही इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। मेडिकल रिपोर्ट में भी करीब आठ गंभीर चोटें बताई गई हैं।
गनर के फरार होने की आशंका पर विधायक बोले- ऐसा हुआ तो अफसर भी नपेंगे
आरोपी गनर मोहित को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया। इस बीच विधायक को उसके फरार होने या फिर साठगांठ कर भगाए जाने की आशंका सताने लगी। इस पर वह अफसरों से बार-बार पूछते रहे। साफ कहा कि अगर सिपाही कहीं गायब हुआ तो अफसर भी नपेंगे। इसकी भी लिखित शिकायत की जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री से भी इस मामले में बातचीत करने की बात कहते रहे। असम चौकी प्रभारी अचल सिंह के कार्य की खुलकर सराहना भी की। कहा, अगर चौकी प्रभारी एक्टिव न होते, तो अनहोनी हो सकती थी।
आरोपी बनाए गए पेशकार की पैरवी करने पहुंचीं एसडीएम सदर
विधायक के भांजे की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में एसडीएम सदर के पेशकार अमित सक्सेना को भी नामजद किया गया है। शुक्रवार को एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी आरोपी अमित को लेकर थाना सुनगढ़ी पहुंचीं। उसको निर्दोष बताते हुए उसकी पैरवी की। उस वक्त विधायक समेत कई भाजपाई भी थाने में मौजूद थे। काफी देर तक बहस चलती रही और फिर एसडीएम अपने पेशकार को लेकर वापस चली गईं। नामजद आरोपी के थाने पहुंचने के बाद भी वापस चले जाने से मामला खासा चर्चा में रहा। इसे लेकर विधायक ने भी नाराजगी जताई।
झगड़े की वजह को लेकर एक चर्चा ये भी
दर्ज एफआईआर में लूटपाट के बाद जानलेवा हमला करने की बात तो कही गई है, लेकिन दोनों पक्षों को सुनने के बाद पुलिस भी झगड़े की वजह को लेकर असमंजस में है। इसी बीच एक चर्चा तेजी से जोर पकड़ रही है कि कुछ दिन पूर्व एक बाइक बेची गई थी। खरीदार को जब ये पता चला कि बाइक चोरी की है, तो वह रुपये वापस करने की बात करने लगा। बताते हैं कि इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी। हालांकि इसकी अभी पुलिस पुष्टि नहीं कर रही है। बाइक किसने, किसको बेची और क्या था मामला? इसकी तस्वीर भी साफ नहीं है। पुलिस इसकी पड़ताल करने की बात कह रही है।
सिपाहियों में भी होने लगी थी गुटबाजी
गनर की गिरफ्तारी के बाद एक तरफ विधायक सख्त लहजे में थे तो वहीं पुलिस में भी गुटबाजी की सुगबुगाहट रही। गनर के पक्ष में कई सिपाही आ गए थे। उन्होंने गनर के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए आपस में इसे लेकर चर्चा भी की। इसे इकतरफा कार्रवाई तक कह दिया गया।