पीलीभीत। निलंबन के दौरान अपने रसूख का इस्तेमाल कर बेटे और अपने संबंधियों के नाम चेक काटकर लाखों का भुगतान करने वाले रिटायर्ड सचिव राजवंदन मिश्रा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। घोटाले का आरोप सिद्ध होने के बाद भी सचिव पर कार्रवाई नहीं करने का खेल पिछले दिनों उजागर होने पर डीएम ने सख्ती दिखाई तो आखिर डीपीआरओ ने सचिव के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करा दी।
बता दें, जिला पंचायतीराज विभाग में पिछले दिनों घोटाले से संबंधित मामलों में प्रधानों और सचिवों पर कार्रवाई के नाम पर अभिलेखों में चल रहा खेल डीपीआरओ कार्यालय के निरीक्षण में पकड़े जाने पर डीएम वैभव श्रीवास्तव का पारा उस वक्त चढ़ गया था जब रिटायर्ड सचिव राजवंदन मिश्रा की फाइल उनके पास पहुंची। जांच में पता चला पूरनपुर की ग्राम पंचायत शिवनगर में तैनाती के दौरान बीते साल सचिव राजवंदन मिश्रा ने लाखों का घोटाला किया। इतना ही नहीं निलंबन अवधि में भी साठगांठ कर बेटे गौरव, रोजगार सेवक धर्मवीर समेत कई लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से 10 लाख से अधिक के चेक काट दिए। गजरौला, पूरनपुर में तैनाती के दौरान प्रधानमंत्री आवास, शौचालय, मनरेगा से कराए जाने वाले कार्यों में घोटाला पकड़े जाने पर सचिव को करीब तीन बार निलंबित किया गया, लेकिन प्रभावी कार्रवाई करने के बजाए डीपीआरओ निलंबित करने के कुछ दिन बाद ही सचिव को बहाल करते चले गए। चर्चा यह भी कि सचिव ने अपने राजनीतिक रसूख का जमकर फायदा उठाया। जांच अधिकारियों को घोटाले पर पर्दा डालने के लिए अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने और निलंबन अवधि में रिटायरमेंट होने तक किसी भी तरह की रिकवरी नहीं करने की हकीकत से वाकिफ होने पर डीएम का पारा चढ़ गया। स्पष्टीकरण मांगने के साथ ही डीपीआरओ को तत्काल एफआईआर कराने के निर्देश दिए, लेकिन यहां भी रिटायर्ड सचिव को बचाने की कोशिश की गई। इसकी जानकारी लगने पर डीएम ने सख्त तेवर दिखाए तो आनन-फानन में डीपीआरओ प्रमोद कुमार यादव ने रिटायर्ड सचिव राजवंदन मिश्रा पर कानूनी शिकंजा कसने को गजरौला थाने में एफआईआर करा दी।
रिटायर्ड सचिव राजवंदन मिश्रा के खिलाफ तो एफआईआर काफी समय पहले ही डीपीआरओ को करा देनी चाहिए थी। निरीक्षण के दौरान अभिलखों को विस्तार से चेक किया। इसमें तमाम अनियमितताएं मिलीं। इसी आधार पर सचिव के खिलाफ एफआईआर कराई गई है।
- वैभव श्रीवास्तव, डीएम