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तीन माह बाद अफसर ले सके निर्णय, हादसे में गई हंसपाल की जान
परिजन ने लगाए थे हत्या के आरोप, विसरा रिपोर्ट में नहीं हो सके साबित
पुलिस ने धारा 304 ए के तहत दो के खिलाफ लगाई चार्जशीट
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। हत्या और हादसे के बीच फंसी मजदूर हंसपाल की मौत की गुत्थी को लेकर आखिरकार अधिकारियों ने लंबे विचार विमर्श के बाद निर्णय लिया है। विसरा की जांच रिपोर्ट, डॉक्टर और विधिक सलाहकारों से मिली राय के बाद दर्ज हत्या की एफआईआर को हादसे की धाराओं में तरमीम कर दिया है। दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी लगा दी गई है।
सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के पिपरा वाले नंबर एक गांव निवासी 18 वर्षीय हंसपाल पुत्र दुलीराम की पांच मार्च को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। उसके एक मकान में मजदूरी करते वक्त करंट लगने की चर्चा तेज रही, लेकिन तीन दिन बाद परिजन ने इसको हत्या बताते हुए तहरीर दी थी। जिसके आधार पर हत्या कर साक्ष्य छिपाने, एसी-एसटी एक्ट के तहत नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसमें संतोष, कुंवरपाल, भारत सिंह, देवदास नामजद किए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में न तो मौत की वजह स्पष्ट हुई, न ही करंट की ओर इशारा किया गया। इसके बाद विसरा को जांच के लिए भेज दिया था। विसरा की रिपोर्ट मिलने के बाद भी गुत्थी सुलझने के बजाय और उलझ गई थी। विसरा में भी मौत की वजह नहीं बताई जा सकी थी। इसके बाद पुलिस ने डॉक्टरों के पैनल और विधिक सलाहकारों से मामले में मंथन किया। सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल ने बताया कि प्रकरण हत्या नहीं, हादसा निकला है। इसलिए दर्ज एफआईआर को 304 ए के तहत तरमीम कर दिया गया। साथ ही दो आरोपियों संतोष और कुंवरपाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है।