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डॉक्टर की डिग्रियों की सत्यता जानने की कवायद, मुंबई में चिकित्सकों के व्यस्त होने के कारण नहीं हो सकी मुलाकात

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डॉक्टर की डिग्रियों की सत्यता जानने की कवायद, मुंबई में चिकित्सकों के व्यस्त होने के कारण नहीं हो सकी मुलाकात
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अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। फर्जी डिग्री से अस्पताल संचालित करने और लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज के नाम पर एक लाख रुपये वसूलने के आरोपी डॉक्टर की डिग्रियों की सत्यता जानने और साक्ष्य जुटाने मुंबई गई पुलिस टीम ने मेडिकल कॉलेज में जाकर वहां के स्टाफ से संपर्क साधा। डॉक्टर की डिग्री को लेकर उनसे बातचीत की गई। हालांकि वहां के डॉक्टरों के ऑपरेशन में व्यस्त होने से शाम तक मुलाकात नहीं हो सकी।
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शहर के एक अस्पताल के संचालक डॉक्टर की बीते माह शिकायत हुई थी। आरोप था कि उन्होंने लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज के नाम पर मरीज के परिवारवालों से एक लाख रुपये वसूले थे। इसके अलावा एक अन्य मरीज की इलाज में लापरवाही से मौत का भी आरोप था। अस्पताल भी फर्जी डिग्रियों से संचालित निकला था। कई दिन चली जांच पड़ताल के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया था। इसके अलावा डॉक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी समेत संगीन धाराओं में एफआईआर एसीएमओ की तरफ से सुनगढ़ी थाने में दर्ज कराई गई थी। पुलिस अब तक डॉक्टर की गिरफ्तारी नहीं कर सकी है। इधर न्यायालय से गैर जमानती वारंट भी नहीं मिल सका था। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए डॉक्टर की डिग्रियों को लेकर साक्ष्य जुटाने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। चूंकि डॉक्टर की ओर से बताया जाता रहा था कि उन्होंने केईएम हास्पिटल एंड सेठ जीएस मेडिकल परेल मुंबई से न्यूरो सर्जरी में ट्रेनिंग की है। उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ फैलोशिप इन न्यूरो सर्जरी हेड ऑफ द डिपार्टमेंट डॉ.अतुल गोयल ने जारी किया है। इसकी सत्यता का पता लगाने के लिए विवेचक इंस्पेक्टर नरेश पाल सिंह को मुंबई भेजा गया है। मंगलवार शाम वह मुंबई पहुंच गए थे। बुधवार को उन्होंने उक्त मेडिकल कॉलेज पहुंचकर इस सिलसिले में स्टाफ से बातचीत की। हालांकि अभी वहां के जिम्मेदार डॉक्टरों के ऑपरेशन में व्यस्त होने की वजह से मुलाकात नहीं हो सकी है। सीओ सिटी धर्म सिंह मार्छाल ने बताया कि विवेचक मुंबई में पड़ताल कर रहा है। अभी डॉक्टरों से मुलाकात नहीं हो सकी है। गहनता से पूरे मामले की पड़ताल कराई जा रही है।
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