सब गोलमाल है...
गर्दन फंसती दिखी तब सचिव को किया
निलंबित, प्रधान पर अब भी मेहरबानी
50 लाख घोटाले में हर बार अलग-अलग आंकड़े पेश करने करने का मामला
मरौरी की ग्राम पंचायत संडा के प्रधान और सचिव पर हैं तमाम गंभीर आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। करीब 50 लाख के घोटाले में प्रधान और सचिव को बचाने के लिए हर बार अलग आंकड़े पेश करने वाले डीडीओ को जब अपनी गर्दन फंसती दिखी तो उन्होंने आनन-फानन में सचिव धर्मदास वर्मा को निलंबित कर दिया। हालांकि प्रधान गेंदनलाल पर वह अब भी मेहरबान हैं। हालांकि सचिव के निलंबन आदेश में भी डीडीओ खेल करने से बाज नहीं आए। उन्होंने इसमें घोटाले की राशि तक का जिक्र नहीं किया है।
मरौरी ब्लॉक की ग्राम पंचायत संडा के ग्रामीणों ने डीएम को दिए शपथपत्र में मनरेगा, ग्राम निधि आदि से हुए विकास कार्यों में करीब 50 लाख के घोटाले का आरोप प्रधान गेंदनाल और सचिव धर्मदास वर्मा पर लगाया था। जांच डीडीओ योगेंद्र पाठक को सौंपी गई। शुरू में करीब पांच लाख के घोटाले की चर्चा थी, कुछ दिन बाद जांच में गबन सिद्ध हुआ, लेकिन सत्ताधारी नेताओं की पैरवी के चलते प्रधान और सचिव को बचाने का खेल शुरू कर दिया गया। पहले 49 हजार, इसके कुछ समय बाद घोटाले की रकम बढ़कर एक लाख बताई गई, जबकि डीएम को भेजी रिपोर्ट में करीब साढ़े तीन लाख रुपये की गड़बड़ी का जिक्र किया गया। डीएम के 13 अगस्त को सचिव को निलंबित करने का आदेश भी डीडीओ ने हवा में उड़ा दिया था। जब अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया तो एक बार फिर डीडीओ ने अफसरों को गुमराह कर गबन की राशि का जिक्र न कर सचिव धर्मदास वर्मा को निलंबित कर दिया। सूत्रों की मानें तो प्रधान एक सत्ताधारी नेता का करीबी है। लिहाजा अफसर उसके खिलाफ कार्रवाई से बच रहे हैं। वहीं सचिव को सामान्य से आरोपों में निलंबित करने के पीछे उसे जल्द बहाल करने की मंशा बताई जा रही है। अफसरों की मानें तो गड़बड़ी के मामले में सचिव और प्रधान दोनों बराबर के दोषी हैं तो कार्रवाई दोनों पर ही होनी चाहिए। इधर, सीडीओ रमेशचंद्र पांडेय का कहना है कि सचिव धर्मदास वर्मा को निलंबित करने के साथ ही प्रधान गेंदनलाल से जवाब तलब किया गया है।