बीसलपुर (पीलीभीत)। विधानसभा भवन के सामने सामूहिक आत्मदाह करने पहुंचे एक ही परिवार के पांच लोगों को लखनऊ पुलिस ने हिरासत में ले लिया और अब अफसर भले ही कार्रवाई का भरोसा दिला रहे हों, लेकिन पूरा मामला सिस्टम पर सवालिया निशान लगा गया है। आखिर एक परिवार क्यों सामूहिक रूप से आत्मदाह करने के लिए लखनऊ पहुंच गया। इस सवाल का अगर जवाब तलाशा जाए तो सिस्टम कटघरे में खड़ा होगा।
सामूहिक दुष्कर्म जैसे संगीन मामले में पहले आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए परिवार को काफी चक्कर लगाने पड़े। इसके बाद कार्रवाई कराने के लिए उनको आए दिन परेशान होना पड़ रहा है। एक आरोपी की गिरफ्तारी तब हुई जब परिवार ने इच्छा मृत्यु की मांग कर दी। इसके बाद पुलिस ने दोबारा पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। फरार दो आरोपियों की गिरफ्तारी भी अब तक नहीं की जा सकी है। पुलिस से कई बार मिलने के बाद भी उनको जब कोई रास्ता न दिखाई न दिया तो उन्होंने आहत होकर परिवार संग आत्मदाह करने का मन बना लिया। इसके बाद अब पुलिस खुद पर सवाल उठे तो फिर आश्वासन देने में जुटी है। दावा किया जा रहा है कि जल्द आरोपी पकड़कर जेल भेजे जाएंगे। सवाल सिर्फ ये है कि जब परिवार ने इतना बड़ा कदम उठाने की ठान ली तो पुलिस एक्टिव हो रही है। यह सब समय रहते क्यों नहीं किया गया। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि इस तरह से मुकदमे में बरती जा रही लापरवाही आगे भी पीड़ित के लिए परेशानी ही बनेगी।
बिलसंडा क्षेत्र के एक गांव की विवाहिता का आठ जून को बीसलपुर से तीन लोगों ने अपहरण कर लिया था। अपहरणकर्ता कार से उसे ले गए और एक जगह बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। विवाहिता दस जून को किसी तरह अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूटकर घर आ गई थी। 12 जून को बीसलपुर कोतवाली में अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में गांव घुघौरा निवासी अर्जुन लालाराम और बदायूूं के थाना दातागंज के गांव जयपालपुर निवासी संजीव कुमार के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। महिला के पिता ने कई दिनों तक जब इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो राष्ट्रपति से इच्छा म़ृत्यु मांगी, तब पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था।