पीलीभीत। कड़ाके की ठंड का असर सबसे अधिक नवजात और छोटे शिशुओं पर पड़ता है। ऐसे में मां का खानपान और देखभाल सीधे तौर पर बच्चे की सेहत से जुड़ा होता है। सर्दियों में मां के भोजन में लापरवाही, ठंडी तासीर वाले पदार्थों का अधिक सेवन व शिशुओं को पर्याप्त गर्मी न मिलना उनकी तबीयत बिगड़ने का प्रमुख कारण बन रहा है। इसलिए माताओं को अपने खानपान का ध्यान रखना आवश्यक है।
जिला महिला अस्पताल में इन दिनों बच्चों की ओपीडी में नवजात और एक से दो साल तक के बच्चों की संख्या बढ़ रही है। बुधवार को जिला महिला अस्पताल के बाल रोग ओपीडी में 30 से अधिक नवजात शिशु देखे गए। इनमें बुखार, खांसी-जुकाम, दस्त सहित अन्य समस्याएं देखीं गईं। चिकित्सकों ने शिशुओं का बुखार आदि देखकर उनको परामर्श देने के साथ परिजन और खासतौर पर शिशुओं की मां को सलाह दी।
बाल रोग चिकित्सक डॉ. सविता गौड़ ने बताया कि नवजात शिशुओं की मां जो भोजन करती है, स्तनपान के जरिए उसका असर सीधे बच्चे पर पड़ता है। इसलिए ठंड में नवजात शिशुओं की मां को गर्म, सुपाच्य और पोषणयुक्त आहार लेना चाहिए। हरी सब्जियां, दालें, दूध, घी, सूप, घी और सूखे मेवे सीमित मात्रा में लाभकारी होते हैं। बहुत अधिक ठंडी चीजें, बासी भोजन और जंक फूड से परहेज जरूरी है क्योंकि इससे बच्चे को गैस, दस्त या सर्दी-जुकाम की समस्या होती है।
शिशुओं की देखभाल के लिए चिकित्सक की सलाह
- नवजात शिशुओं को भीषण ठंड में दो-तीन परत के ऊनी कपड़े पहनाएं।
- सिर, कान व पैरों को विशेष रूप से ढकना चाहिए ताकि सर्द हवाओं के संपर्क में न आएं।
- शिशु को धूप दिखाएं व सुबह-शाम की ठंड में बाहर लेकर नहीं निकलें।
- कमरे का तापमान ज्यादा रखें।
- नवजात बच्चों की केएमसी करें।