पीलीभीत। जालसाजों द्वारा खातों से रुपये उड़ाने के मामले लंबे समय से पुलिस के लिए नासूर बने हैं। सर्विलांस सिस्टम के बाद भी पुलिस पुराने ढर्रे पर चलने को मजबूर है, लेकिन जालसाज हाइटेक होते जा रहे हैं। ठगों ने अब ठगी करने का नया तरीका निकाल लिया। मुफ्त एलईडी लाइट बांटने के बहाने बायोमेट्रिक मशीन उनके फिंगर प्रिंट फीड किए और आधार कार्ड की कॉपी हासिल की, इसके लिए बाद लोगों के खातों से हजारों रुपये उड़ा लिए। तीन दिन में इस तरह के 10 मामले सामने आने पर पुलिस जांच में जुट गई है। पुलिस बैंक अधिकारियों से संपर्क कर ठगों की तलाश में जुटी है।
सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के नौगवां पकड़िया गांव के रहने वाले और चाउमीन का ठेला लगाने वाले छोटेलाल के खाते से 2300, शांति देवी के खाते से 4300, ज्योति के खाते से 11600, विनीता के खाते से 12500, सत्यवीर के खाते से 8600 और रामबाबू के खाते से 7800 रुपये ठग उनके फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग उड़ा ले गए। तीन दिन के अंदर पुलिस के पास ऐसे 10 लोगों के केस सामने आए हैं। पीड़ितों ने इन मामलों की शिकायत सुनगढ़ी पुलिस से की।
इन लोगों ने पुलिस को बताया कि उनके पास न तो कोई कॉल आई, न ही उनमें से किसी ने अपने खाते से जुड़ी कोई जानकारी दी। फिर भी अचानक खातों से रुपये निकल गए। मामला संज्ञान में लेकर पुलिस ने जांच शुरू की। छह मामले बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य आईसीआईसीआई व एसबीआई के निकले। पुलिस ने बैंक जाकर भी ठगी की पड़ताल की। इसमें खाते से ऑनलाइन रकम निकालने की पुष्टि हुई। रुपये मुंबई के बोरीबली वेस्ट इलाके के एक जनसेवा केंद्र से निकाला जाना पाया गया। बैंक अफसरों से हुई बातचीत के बाद सामने आया कि रुपये फिंगर प्रिंट का किसी विधि द्वारा गलत इस्तेमाल करके निकाले गए हैं। फिंगर प्रिंट किस तरह से जुटाए गए , पुलिस ने इसको लेकर भी पड़ताल की तो कुछ सुराग हाथ लगे। अभी कोई तहरीर न मिलने के कारण पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, लेकिन गिरोह का पर्दाफाश करने को छानबीन तेज कर दी गई है। हालांकि ठगों की लोकेशन बिहार, छत्तीसगढ़ और मुंबई निकलने पर इनकी धरपकड़ आसान नहीं लग रही।
इस तरह जुटाए आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट
खातों से रकम निकालने के लिए फिंगर प्रिंट का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आने पर पुलिस ने गहराई से जांच की। पता लगा कि बीते माह गांव में दो युवक आए थे। उन्होंने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री योजना के तहत एलईडी लाइट मुफ्त दी। आयुष्मान योजना का लाभ दिलाने के लिए फार्म भरवाए। उनको गांव की एक आशा वर्कर लेकर आई थी। दोनों युवक बायोमेट्रिक मशीन में फिंगर प्रिंट ले गए थे। आधार कार्ड की कॉपी भी ली थी। पुलिस को अंदेशा है कि यहीं से फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग की गई। पुलिस ने एलईडी लाइट बांटने आए एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की।
लखीमपुर में भी सामने आ चुका है मामला
पुलिस के मुताबिक फिंगर प्रिंट फीड करके उसके जरिए बैंक खातों से रुपये निकालने का मामला इससे पहले लखीमपुर में भी सामने आ चुका है। वहां भी योजनाओं के नाम पर फिंगर प्रिंट लिए गए और फिर गांव के कई लोगों के खातों से रुपये निकाल लिए।
फिंगर प्रिंट का इस्तेमाल कर खातों से रुपये निकालने का मामला संज्ञान में आया है। जिस तरह से ठगी की गई है, वह गंभीर विषय है। इसकी छानबीन कर सख्त कार्रवाई कराई जाएगी। - रोहित मिश्र, एएसपी