कलीनगर (पीलीभीत)। जंगल से लगातार दूरी बनाए बाघिन 28 दिन में दूसरी बार पकड़ में आ गई। दस दिन से बाघिन शहर के नजदीक चहलकदमी कर छोटे जानवरों को मार रही थी। अब पिंजरे में कैद होने के बाद संभावना जताई जा रही है कि इस बार इसे चिड़ियाघर भेजा जा सकता है। फिलहाल उच्च स्तरीय आदेश का इंतजार किया जा रहा है।
कलीनगर के अटकोना गांव निवासी सुखविंदर सिंह के घर से 26 दिसंबर को इस बाघिन को बेहोश करके पकड़ा गया था। बेहोश किए जाने से पहले बाघिन 11 घंटे तक दीवार पर बैठी रही थी। पूरे देश में इस बाघिन का वीडियो वायरल हो गया था। बाघिन के स्वभाव को देख विशेषज्ञ भी हैरान रह गए थे। स्वास्थ्य को लेकर जांच पड़ताल की गई थी।
एक जनवरी को उच्चस्तरीय निर्देश पर बाघिन को कॉलर आईडी लगाकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के ही घने जंगल में छोड़ा गया ताकि वह दोबारा बाहर न आ सके, लेकिन चंद दिन में ही बाघिन जंगल से बाहर निकल आई। 11 जनवरी को शहर में असम चौराहा के नजदीक बाघिन की मौजूदगी देखी गई। इससे विभाग की चिंता बढ़ गई थी।
बाघिन ने देवहा नदी का क्षेत्र पकड़ लिया। तीन गांव की सीमा में बाघिन चहलकदमी कर छोटे जानवरों को मार रही थी। स्थिति को देख बाघिन को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया, जिसमें बाघिन कैद हो गई। बाघिन के कमजोर होने की बात कही जा रही है। अब विभागीय चिकित्सक प्राथमिक जांच पड़ताल में जुटे हैं, लेकिन बाघिन के स्वभाव और सेहत को देखते हुए उसे जंगल से बाहर आसपास के चिड़ियाघर में भेजे जाने की संभावना अधिक जताई जा रही है।
प्राकृतिक वासस्थल या चिड़ियाघर, संशय बरकरार
28 दिन में लगातार दूसरी बार पकड़ी गई बाघिन को छोड़े जाने को लेकर संशय बरकरार है। बाघिन को बाहर भेजा जाना तय माना जा रहा है, लेकिन नया ठिकाना प्राकृतिक वासस्थल होगा या फिर चिड़ियाघर, अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। अधिकारी भी उच्चस्तरीय आदेश का पालन करने की बात कह रहे हैं। बाघिन के स्वभाव को लेकर अधिकारी इस बारे में कोई निर्णय लेंगे।
बाघिन को देखने के लिए तीन गांव के लोग पहुंचे
बाघिन के पिंजरे में कैद होने की जानकारी फैलते ही तीन गांव के लोग मौके पर पहुंच गए। स्थिति को देख वन अफसर ने पुलिस फोर्स को मौके पर बुलाया। पहले तो पुलिसकर्मी भी बाघिन को देखने में जुट गए, लेकिन सख्ती के बाद पुलिसकर्मियों ने भीड़ को दूर किया। चारों तरफ से काली पन्नी डाल दी गई, ताकि कोई बाघिन को देख न पाए। दूर से देखने के लिए भी भीड़ न जुटे। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद बाघिन को मौके से ले जाया जा सका।
विश्वनाथ माहौर।
विश्वनाथ माहौर।