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बलवा, पुलिस टीम पर पथराव और तोड़फोड़ के सभी 17 आरोपी दोषमुक्त

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पीलीभीत। बाघ के हमले में किसान की मौत के बाद हुए हंगामे को लेकर ग्रामीणों पर दर्ज बलवा, जानलेवा हमला, सरकारी कार्य में बाधा, सेवन क्रिमिनल लॉ एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आठ साल पुराने मामले में सभी 17 आरोपियों को अदालत से राहत मिल गई। सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अमरजीत वर्मा ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
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पूरनपुर कोतवाली में दरोगा नरेश पाल की ओर से इस मामले में आठ साल पहले रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें बताया था कि पांच सितंबर 2012 को खमरिया पट्टी गांव निवासी किसान नंदलाल पुत्र माखनलाल की बाघ के हमले में मौत हो गई थी। परिजन और ग्रामीण शव लेकर असम हाईवे पर खमरिया बाईपास तिराहा पर जमा थे। जाम लगाकर लाठी- डंडे और बंदूक लेकर आई भीड़ काफी उत्तेजित थी। पुलिस की ओर से जब जाम खुलवाने की कोशिश की गई तो भीड़ हमलावर हो गई। भीड़ ने पुलिस पर पथराव करने के साथ कई वाहनों में तोड़फोड़ भी की। पुलिसकर्मी भी इस हमले में घायल हुए थे। संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने मामले में 17 लोगों को जेल भेजा था। विवेचना के बाद पुलिस ने सभी के खिलाफ अलग-अलग आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। 28 जनवरी 2015 से मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायालय में शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए। सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अमरजीत वर्मा ने साक्ष्य के अभाव में सभी को दोषमुक्त कर दिया। सभी के जमानतनामे और बंधपत्र निरस्त किए गए।
ये बनाए गए थे आरोपी
गांव रम्पुरा कपुरपुर निवासी रामेश्वर दयाल, मोहल्ला कायस्थान निवासी सतेंद्र सिंह, खमरिया पट्टी गांव निवासी रामपाल, डोरीलाल, मोतीलाल, कोमिल प्रसाद, रामेश्वर दयाल, बाबूराम, धर्मेंद्र सिंह, विजय कुमार, गंगाराम, धर्मेंद्र कुमार, प्रेमपाल, नंदलाल, झब्बूलाल, खरगाईलाल, रामदास।
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रामदास की विचारण के दौरान हुई मौत
मामले में एक आरोपी रामदास की विचारण के दौरान मौत हो गई थी। ऐसे में उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई अपशामित कर दी गयी थी।
पुलिस को उसकी ही कहानी में बचाव पक्ष ने घेरा
विचारण के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस को उसकी ही कहानी में घेरा। एफआईआर में जिन पुलिसकर्मियों को चोटिल बताया गया, उनके बयान पर बचाव पक्ष ने आपत्ति करते हुए कहा कि पुलिस वालों ने खुद कहा कि उनको चोट नहीं आई। जाम लगाए जाने से लेकर हाथ में लाठी और कुल्हाड़ी की बात पर भी सवालों में घेरा गया। स्वतंत्र साक्षी न होने पर भी बचाव पक्ष ने आपत्ति जताई।
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