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मुक्तिधाम में जगह नहीं... अस्थायी श्मशान और कब्रिस्तान बनाने की तैयारी

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पीलीभीत। कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। एल-2 अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज जान गंवा रहे हैं। जिसके चलते मुक्तिधाम में भी अंतिम संस्कार के लिए जगह कम पड़ गई है। इसे देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग ने कोविड अस्पताल में मरने वालों के लिए एक अलग अस्थायी श्मशान घाट और कब्रिस्तान बनाने की तैयारी शुरू की है। इलाज के दौरान मरने वाले संक्रमितों को अस्थायी श्मशान में ही अंतिम संस्कार कराया जाएगा। उनके शव घर नहीं ले जाए जाएंगे। कब्रिस्तान और श्मशान घाट के लिए जगह चिह्नित कराने के लिए सीएमओ ने प्रशासन को पत्र लिखा है।
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में प्रतिदिन पांच से 10 संक्रमितों की जान जा रही है। इसमें अधिकांश एल-2 अस्पताल में जान गंवा रहे हैं। यह बात दीगर रही कि अधिकांश मौतों को स्वास्थ्य विभाग नॉन कोविड मान रहा है, मगर एहतियात के तौर पर कोरोना संदिग्ध मानते हुए कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार कराने की बात कही जा रही है। एक जनवरी से 30 अप्रैल तक 66 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है, इसमें अधिकांश ने अप्रैल में जान गंवाई। इन सभी को शहर के श्मशान घाट या फिर मरने वालों के गांवों में अंतिम संस्कार को ले जाया जाता था। गाइडलाइन के मुताबिक संक्रमण से मरने वाले लोगों का शव सीधे परिवार वालों को नहीं दिया जा सकता। शव वाहन और स्वास्थ्य टीम की मौजूदगी में ही उनका अंतिम संस्कार कराया जाता है। इन दिनों स्टाफ और वाहनों की भी कमी है। सिर्फ दो शव वाहन मौजूद हैं। ऐसे में कोविड अस्पताल में मरने वालों को उनके गांव ले जाना होता है, तो समय भी लगता हे और दिक्कतें भी रहती हैं। कई बार परिवार वालों से भी कहासुनी हो जाती है। इस समस्या को दूर करने के लिए संक्रमितों के शवों के अंतिम संस्कार और दफनाने के लिए जगह तलाशी जा रही है। जगह मिलने के बाद संक्रमितों के शव श्मशान और कब्रिस्तान में ही ले जाकर अंतिम संस्कार कराए जाएंगे। अलग-अलग जगह पर शवों को ले जाने नहीं दिया जाएगा।
मुक्तिधाम में भयावह स्थिति, गंदगी की भरमार
भाजपा विधायक संजय सिंह गंगवार ने मुक्तिधाम में भयावह स्थिति और गंदगी की भरमार होने की बात कहते हुए डीएम को पत्र लिखकर व्यवस्थाएं सुचारु कराने को कहा है। साथ ही नगरपालिका से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने पर जोर दिया है।
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विधायक ने डीएम को लिखे पत्र में कहा कि सामान्यत: मुक्तिधाम में प्रतिदिन दो से तीन शव पहुंचते थे। मगर पिछले बीस दिन से यह आंकड़ा 15-20 प्रतिदिन पर जा पहुंचा है। मुक्तिधाम स्थल पर सिर्फ 10 शवों की अंत्येष्टि करने व्यवस्था है। अधिक शव पहुंचने पर शोकाकुल परिवार को मजबूरन जमीन पर ही अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। हिंदू धर्म में तीसरे दिन शव स्थल से अस्थियां एकत्र की जाती हैं। ऐसे में मुक्तिधाम में शवदाह करना चुनौती बन रहा है। उन्होंने अस्थायी रूप से शवों के चबूतरे बनवाने को कहा। यह भी कहा कि मुक्तिधाम में गंदगी की भरमार है। उसकी प्रतिदिन सफाई कराकर सैनिटाइजेशन करवाया जाए। इसके लिए नगरपालिका की एक टीम वहां लगाई जाए। हालांकि मुक्तिधाम समिति के सचिव देवेश बंसल का कहना है कि श्मशान घाट में अभी कोविड अस्पताल में मरने वाले और शवों दोनों का ही अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। ऐसे में वहां संक्रमण का खतरा बना हुआ था। इसी को देखते हुए प्रतिदिन सैनिटाइजेशन कराया जा रहा है।
कोरोना से मरने वालों का अंतिम संस्कार एक ही स्थान पर कराया जा सके इसके लिए अस्थायी कब्रिस्तान और श्मशान घाट बनाया जाएगा। इसके लिए रणनीति बनाई गई है। शहर में दो जगह चिह्नित करके इसकी शुरूआत जल्द कराई जाएगी। जगह के लिए प्रशासन को पत्र भेजा है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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