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सरकारी आंकड़े कुछ और...श्मशान में लग रहीं लाशों की कतारें

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पीलीभीत। श्मशान घाट में लाशों की संख्या दिन पर दिन बढ़ रही है। जहां पहले प्रतिदिन दो से तीन शव पहुंचते थे, वहां इन दिनों कभी पांच, सात तो कभी दस शव तक एक दिन में पहुंच रहे हैं। उन्नीस दिन में सिर्फ शहर के श्मशान घाट में ही 65 शवों का दाह संस्कार किया जा चुका है। हालांकि इनकी कोरोना जांच नहीं हुई थी। लेकिन इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि इनमें कोरोना संक्रमित भी हों। क्योंकि कुछ की मौत के बाद कोरोना का शोर भी मचा था। ऐसे में सरकारी आंकड़े कहीं न कहीं सवालों में हैं। सोमवार को भी दोपहर तक दस शवों का अंतिम संस्कार हुआ।
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कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर में पीलीभीत शहर के श्मशान घाट पर शव यात्राओं का तांता लगने लगा है। संक्रमितों की संख्या की बात करें तो वर्तमान में 287 केस एक्टिव चल रहे हैं, जबकि अब तक कुल 92 मौतें हो चुकी है। सामान्य दिनों में श्मशान घाट पर प्रतिदिन एक से दो शव अंत्येष्टि को पहुंचते थे। मगर, होली के बाद अप्रैल से श्मशान घाट पर अंत्येष्टि के लिए शवों की कतारें लगनी शुरू हो गई हैं। प्रतिदिन पांच से छह का आंकड़ा चल रहा है। मरने वालों में 45 से 60 उम्र वालों की संख्या 30 फीसदी, 60 से अधिक उम्र वाले 70 फीसदी हैं। हालांकि जो मौतें हुई है वह कोई नेचुरल मौत नहीं है। इनमें अधिकांश लोगों को अस्पतालों में सांस, शुगर, बीपी, हाइपरटेंशन, कैंसर का इलाज चल रहा था। चार से पांच फीसदी की दुर्घटना में मरने वाले शामिल हैं। संवाद
कब्रिस्तान में भी दफन होने वालों की संख्या बढ़ी
कब्रिस्तान की तस्वीर भी श्मशान घाट से कम नहीं है। यहां भी मरने वालों का आंकड़ा तेजी पकड़ रहा है। एक कब्रिस्तान में 15 दिनों में 20 से अधिक शवों को दफन किया जा चुका है। इतनी ही संख्या अन्य कब्रिस्तानों पर भी है।
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शहर के श्मशान घाट का 19 दिनों का आंकड़ा
दिनांक - लाशों की संख्या
01 अप्रैल - 2
02 अप्रैल - 2
03 अप्रैल - 3
04 अप्रैल - 3
05 अप्रैल - 5
06 अप्रैल - 01
07 अप्रैल - 03
08 अप्रैल- 01
09 अप्रैल - 05
10 अप्रैल -01
11अप्रैल - 03
12 अप्रैल- 05
13 अप्रैल - 05
14 अप्रैल - 01
15 अप्रैल - 04
16 अप्रैल - 03
17 अप्रैल - 05
18 अप्रैल -03
19 अप्रैल -10
कोरोना से मौतों की पुष्टि जांच के बाद ही की जाती है। कुछ मौतें बीमारी और सामान्य तौर हुई हैं। उनके परिवार ने जांच नहीं कराई। बिना जांच के कुछ भी कहना उचित नहीं है। कोरोना से रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले और इस साल अब तब केवल 92 मौत हुई हैं।
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- डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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