पीलीभीत। कोरोना के संक्रमण से जिला कारागार को बचाए रखने के लिए सैनिटाइजेशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कई जिलों में सोडियम हाईपोक्लोराइड केमिकल का इस्तेमाल होने पर सैनिटाइजेशन टनल बंद करने के भी आदेश किए जा चुके हैं। मगर यहां की जिला जेल में इस केमिकल का इस्तेमाल सिर्फ दीवार, फर्श और दरवाजों पर ही किया जा रहा है। सैनिटाइजेशन टनल में आइसोप्रोपेनॉल अल्कोहल की 10 प्रतिशत मात्रा ही पानी में मिलाई जा रही है। इसको पूरी तरह से सुरक्षित बताया गया है।
कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने के साथ ही बचाव के प्रयास तेजी से शुरू कर दिए गए थे। 603 की क्षमता वाली 17 बैरक की जिला जेल में पहले ही 800 से अधिक बंदी हैं। जेल में क्षमता से 203 बंदी अधिक हैं। ऐसे में जेल को कोरोना संक्रमण से बचाए रखने के लिए सैनिटाइजेशन टनल बंदियों द्वारा बनाई गई है। इसके अलावा बंदी खुद मास्क भी तैयार कर रहे हैं। कई जिलों में सैनिटाइजेशन टनल में सोडियम हाइपोक्लोराइड केमिकल का प्रयोग किया जा रहा था। इस केमिकल को इंसानों के लिए घातक बताते हुए सरकार ने टनल पर रोक लगाई है। मगर, इन सबके बीच जनपद की जिला कारागार में टनल काम कर रही है। क्योंकि यहां सोडियम हाइपोक्लोराइड का प्रयोग नहीं हो रहा है। इस केमिकल से सिर्फ जेल की दीवार, दरवाजे और फर्श की सफाई की जा रही है। डिप्टी जेलर विक्रम सिंह ने बताया कि सैनिटाइजेशन टनल में आइसोप्रोपेनॉल अल्कोहल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी मात्रा भी निर्धारित हैं। 10 लीटर पानी में सिर्फ एक लीटर मिलाया जाता है। यह पूरी तरह से सुरक्षित है। कोरोना संबंधी किसी तरह की कोई दिक्कत भी अभी तक नहीं आई है।
रंगहीन, तीक्ष्ण गंध वाला यौगिक है आइसोप्रोपेनॉल अल्कोहल
जेल में सैनिटाइजेशन टनल में इस्तेमाल होने वाला आइसोप्रोपेनॉल अल्कोहल एक यौगिक है। यह रंगहीन, ज्वलनशील और तीक्ष्ण गंध वाला है। इसका उपयोग औद्योगिक एवं घरेलू उपयोग के रसायनों के उत्पादन में होता है। एंटीसेप्टिक, संक्रमणहारी, विसंक्रामी और डिटर्जेंट में इसका प्रयोग किया जाता है।