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कोरोना से युवक की संदिग्ध मौत के 48 घंटे बाद भी कनाडा सरकार ने नहीं सौंपा शव, परिजन उलझन में

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पूरनपुर। संदिग्ध मौत के 48 घंटे बाद भी कनाडा सरकार ने छात्र सूरतपाल सिंह का शव उसके भाई को नहीं सौंपा। दूसरे दिन भी परिवार वाले उसका शव मिलने की आस लगाए रहे। कनाडा के चिकित्सकों ने महत्वपूर्ण जांचें पूरी होने के बाद ही छात्र का शव उसके भाई को सौंपने की जानकारी दी। भाई को शव मिलने के बाद उसे घर लाया जाएगा या कनाडा में ही उसका अंतिम संस्कार होगा, इस पर परिवार वाले शव मिलने के बाद ही निर्णय लेंगे।
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क्षेत्र के गांव चंदुइया निवासी बलराज सिंह के दो पुत्र सूरतपाल सिंह और अमृतपाल सिंह 16 माह पहले कनाडा में बिजनेस प्रबंधन का कोर्स करने गए थे। तीन दिन पहले सर्दी और जुकाम की शिकायत पर शुक्रवार को सूरतपाल सिंह को कनाडा के ब्रम्टन शहर के सिविल अस्पताल ले जाया गया था। वहां चिकित्सकों ने सूरतपाल को अस्पताल में भर्ती कर भाई को घर भेज दिया था। करीब एक घंटा बाद सूरतपाल सिंह की मौत की सूचना अस्पताल से भाई अमृतपाल सिंह को दी गई। निधन की सूचना मिलने के बाद पूरनपुर इलाके में छात्र की मौत कोरोना से होने का हल्ला मच गया। हालांकि पिता ने बेटे की मौत निमोनिया से हार्ट ब्लॉक होने की जानकारी दी। छात्र की संदिग्ध मौत के बाद चिकित्सकों ने शव उसके भाई को न सौंपकर 48 घंटे के बाद देने को कहा था। निर्धारित समय बीतने के बाद भी छात्र का शव उसके भाई को नहीं सौंपा गया। परिवार वालों ने शनिवार को अमृतपाल और उसके ममेरे भाई से मोबाइल पर संपर्क किया तो वहां से शव न मिलने की जानकारी दी गई। चाचा महावीर सिंह ने बताया कि सूरतपाल का शव अमृतपाल को मिलने के बाद ही उसके अंतिम संस्कार के बारे में निर्णय लिया जाएगा कि उसका शव घर लाया जाए या फिर परिवार के सदस्य कनाडा जाएं। इस बीच विधायक बाबूराम पासवान समेत तमाम लोगों ने घर पहुंचकर छात्र की असामयिक मौत पर संवेदना व्यक्त की।
फेसबुक के वायरल मेसेज को लेकर परिजन असमंजस में
अमृतपाल सिंह की फेसबुक पर चल रहा एक मेसेज सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना रहा। मेसेज में भाई के शव भारत लाने के लिए 20 हजार डॉलर की जरूरत का हवाला दिया गया। चाचा महावीर सिंह ने इस मामले में पूछने पर बताया कि उनके परिवार की धन की कोई कमी नहीं है, न ही मेसेज उनकी ओर से डाला गया। यह मेसेज संभवत: कनाडा की एक संस्था ने डलवाया है, यह संस्था विपदा में फंसने वाले लोगों की मदद करती है, यदि संबंधित को जरूरत नहीं होती है तो वह धनराशि बाद में मदद के दूसरे कामों पर खर्च कर देती है।
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