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कोरोना से जंग अभी बाकी, फसलें तबाह करने आ गया अमेरिकी कीट

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पीलीभीत। चीन से आए कोरोना वायरस से जंग अभी बाकी है। मगर, अब अमेरिका से फॉल आर्मी वर्म (कीट) किसानों को दर्द देने के लिए भारत में दस्तक दे चुका है। यह कीट देश के विभिन्न प्रदेशों से होते हुए उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। फॉल आर्मी वर्म नामक कीट गन्ना, मक्का और ज्वार की फसलों पर हमला कर उनकी पत्तियों को चट कर जाता है। कृषि विभाग ने फसलों में खतरे को देखते हुए किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
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अन्नदाताओं की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। पहले कोरोना के चलते लॉकडाउन से जूझना पड़ा। फिर आंधी-बारिश ने आकर कहर मचाया। इन सबसे किसान पहले से ही परेशान थे, वहीं अब उनके सामने नई मुसीबत आ गई। तीन साल पहले अफ्रीका में मक्के की फसल बर्बाद करने वाला अमेरिकी कीट फॉल आर्मी वर्म (मोटी सूड़ी) देश के कई राज्यों में दस्तक दे चुका है। यदि अगर समय रहते इस कीट पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में यह फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
100 किमी सफर तय करता है यह कीट
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस ढाका के मुताबिक फॉल आर्मी वर्म मुख्यता मक्का का कीट है। यदि मक्का उपलब्ध नहीं होती है तो यह ज्वार या गन्ने की फसल पर आक्रमण करता है। फॉल आर्मी वर्म के वयस्क पतंगे पौधों की तलाश में 100 किमी से भी अधिक गति से उड़ सकते हैं। इस कीट की एक मादा 1000 से अधिक अंडे देती हैं, जो 50 से लेकर 200 तक समूहों में होते हैं। इन अंडों से चार-छह दिन में सूड़ी निकलती है। सूड़ी की आयु 14 से 18 दिन की होती है। इसी अवस्था में यह कीट फसल को नुकसान पहुंचाता है। मोटी सूड़ी के नाम से जाने वाला यह कीट पहले नवजात पौधों को नुकसान पहुंचाता है। उसके बाद बड़े पौधों की पत्तियों में मध्य शिरा को छोड़कर पूरी पत्ती खा जाता है। इससे फसल की पैदावार प्रभावित हो जाती है।
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ऐसे करें नियंत्रण
फॉल आर्मी वेट कीट से बचाव को इमामेक्टिन बेंजोएट 100 ग्राम प्रति एकड़ या इंडोस्काकार्ब 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर में छिड़काव कर फसल को बचाया जा सकता है। इसके अलावा कयूनालफॉस 20ईसी, प्रोफेनोफास 40 प्लस, क्लोरपैरिफॉस आदि दवाओं का भी छिड़काव कर सकते हैं।
कीट का प्रकोप दिखे तो तत्काल दें जानकारी
फॉल आर्मी वर्म को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। यदि कहीं इस कीट का प्रकोप दिखता है तो किसान मोबाइल नंबर 9454247111, 9454 257111 पर संपर्क कर सकते है। इन नंबरों पर व्हाट्सएप भी कर सकते हैं। -डॉ. मुकेश कुमार, जलिा कृषि रक्षा अधिकारी
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