बीसलपुर। हर साल 14 अक्तूबर से शुरू होने वाले ऐतिहासिक रामलीला मेला मंचन पर इस बार कोरोना का ग्रहण लग गया है। कोरोना में शासन की नई गाइडलाइन न आने से अभी तक स्थानीय प्रशासन ने रामलीला मेला आयोजन की अनुमति नहीं दी है, न ही अब तक रामलीला मंचन की तैयारी शुरू की गई है। 100 साल के इतिहास में यह पहला मौका है, जब रामलीला मेला लगने के आसार नहीं लग रहे हैं।
हर साल शरद ऋतु प्रारंभ होते ही यहां भोलेश्वर नाथ मंदिर के विशाल मैदान में एक माह तक ऐतिहासिक रामलीला का मंचन होता है। रामलीला मेला में स्थानीय स्तर पर पुराने कलाकारों के अलावा वृंदावन से भी कलाकार आकर हिस्सा लेते हैं। अधिकांश स्थानीय कलाकार रामायण के पात्रों का मंचन करते हैं। देश के विभिन्न शहरों से दुकानदार मेले में आकर खिलौने, फर्नीचर, बर्तन, कपड़े आदि की दुकानें लगाते हैं। सर्कस, नौटंकी, नाट्य मंचन, मौत का कुआं, डांस पार्टी, काला जादू जैसे खेल तमाशे भी मेला मैदान में सजते हैं। अक्तूबर से चहल-पहल शुरू होती है तो दशहरा तक चलती है। एक महीने तक कस्बे और आसपास के गांवों में केवल रामलीला का ही शोर रहता है। ग्रामीण धान की फसल कटते ही परिवार सहित रामलीला देखने आते हैं। दुकानदार और खेल तमाशा करने वाले कलाकारों को भी रामलीला मेले से खासी आमदनी होती है। रामलीला मेला कमेटी के पदाधिकारी भी मंचन शुरू होने से एक माह पहले ही शिव और राम बरात की तैयारियां शुरू कर देते हैं। इस बार कोरोना का प्रकोप होने की वजह से मेला आयोजन पर ग्रहण लगता दिख रहा है। हर साल की तरह अभी रामलीला मेला में न तो खेल तमाशों की बुकिंग शुरू हुई है, न ही दुकान लगाने वालों ने रामलीला कमेटी से मेला मैदान में जगह देने के लिए संपर्क किया है। मेला कमेटी के पदाधिकारी बताते हैं कि रामलीला मंचन के बारे में 30 सितंबर को शासन से गाइडलाइन जारी होगी। उसके बाद ही रामलीला के आयोजन को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
34 साल पहले राम से युद्ध करते हुए मारा गया था रावण
बीसलपुर की रामलीला में रामायण के पात्रों के मंचन का इतिहास बहुत पुराना है। यह रामलीला 100 साल से भी ज्यादा पुरानी मानी जाती है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार वर्ष 1986 में रावण वध की लीला चल रही थी। उसमें मोहल्ला दुर्गा प्रसाद के गंगा विष्णु उर्फ कल्लूमल रस्तोगी रावण का अभिनय कर रहे थे। रावण वध से एक दिन पहले कल्लूमल ने इच्छा प्रकट की कि भगवान श्रीराम के हाथों अगर उन्हें इस संसार से वाकई मुक्ति मिल जाए तो बहुत अच्छा रहेगा। अगले दिन राम-रावण युद्ध शुरू हुआ। उसमें राम का वाण लगते ही रावण का अभिनय करने वाले कल्लूमल की वास्तविक मौत हो गई। जो दर्शक राम-रावण युद्ध देख रहे थे, वह पहले समझे कि वह रावण के मरने का अभिनय कर रहे हैं, मगर जब कल्लूमल बहुत देर तक नहीं उठे तो साथी कलाकारों ने हिलाया-डुलाया। मगर, रावण का अभिनय करते हुए उनके प्राण पखेरू उड़ चुके थे। तबसे बीसलपुर में रामलीला मंचन दर्शकों में और ज्यादा लोकप्रिय हो गया। हर साल रामलीला मेले में स्थानीय कलाकार रामायण के पात्र राम, भरत, लक्ष्मण, सीता, शत्रुघ्न, अंगद, हनुमान, रावण, बालि, सु्ग्रीव आदि का मंचन करते हैं। उसके बाद वृंदावन के कलाकार रात में रासलीला का मंचन भी करते हैं। उसमें राधा कृष्ण की झांकी सजती है। उसे दर्शक पूरे उत्साह से देखते हैं।
कवि सम्मेलन पर भी ग्रहण
मेले में प्रत्येक वर्ष अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरे का भी आयोजन किया जाता है। इसमें देश के विभिन्न शहरों से कवि और शायर आकर अपनी रचनाएं सुनाते हैं। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन भी मुश्किल में है।
रामलीला मेला आयोजन में संशय
रामलीला मेला आयोजन में संशय है। 30 सितंबर को शासन की नई गाडडलाइन आने वाली है। इसमें मेला कराने की अनुमति मिल भी गई तो उसमें भीड़ लगाने पर प्रतिबंध रहेगा। हर साल एक माह पहले ही दुकानें, खेल-तमाशों की बुकिंग होने लगती थी, इस बार कोरोना के चलते बंद है। - गोपाल कृष्ण अग्रवाल, प्रबंधक मेला कमेटी
रामलीला मेला आयोजन के संबंध में 30 सितंबर को शासन से नई गाइडलाइन जारी होगी। उसमें यदि रामलीला मेला आयोजन की अनुमति मिली, तभी कार्यक्रम हो सकेगा। - चंद्रभानु सिंह, एसडीएम