पीलीभीत। 17 साल पुराने मिलावटी दूध बेचने के एक मामले में न्यायालय ने फैसला सुनाया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुंदर पाल ने ख्यालीराम मौर्य को दोषी ठहराया है। उसे एक वर्ष के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है।
यह मामला 25 जून 2009 का है। उस दिन सुबह खाद्य निरीक्षक ने पूरनपुर रोड पर ग्राम गायबोझ के समीप ख्यालीराम मौर्य को रोका था। ख्यालीराम राजीव कॉलोनी, थाना सुनघड़ी का निवासी है। वह साइकिल पर केन में गाय-भैंस का मिश्रित दूध विक्रय के लिए ले जा रहा था। खाद्य निरीक्षक ने उससे दूध बेचने का लाइसेंस मांगा। ख्यालीराम ने बताया कि उसके पास लाइसेंस नहीं है। दूध में मिलावट का संदेह होने पर डेढ़ लीटर दूध खरीदा गया। इसे राजकीय प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया। परीक्षण रिपोर्ट में दूध का नमूना मिलावटी और अधोमानक पाया गया। इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था। न्यायालय ने दो पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद फैसला सुनाया। संवाद
न्यायालय ने की टिप्पणी
न्यायालय ने अपने पारित आदेश में लिखा कि दोष सिद्ध अभियुक्त पर दूध में मिलावट कर उसे सार्वजनिक विक्रय के लिए ले जाने का आरोप सिद्ध हुआ है। दूध एक खाद्य वस्तु है। यह मानव उपभोग में आती है। अधोमानक एवं अपमिश्रित खाद्य पदार्थों के उपभोग से मानव स्वास्थ्य को हानि पहुंचती है। इससे मानव जीवन भी संकट में आ जाता है।