85 हजार का आया बिल, रोकर सुनाया दुखड़ा
बरातबोझ निवासी दिलीप कुमार मजदूरी करते हैं। दिलीप ने बताया कि उनके यहां एक किलोवाट का कनेक्शन है। महीने में तीन-चार सौ रुपये का बिल आता है, लेकिन इस बार 85 हजार रुपये का बिल आ गया है। दिलीप ने रोते हुए बताया कि इसकी शिकायत कई बार कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी। वह इतना बड़ा भुगतान कहां से करें। ऊपर से कर्मचारी कनेक्शन काटने की धमकी दे रहे हैं। निगम में शिकायत करने पर एक कर्मचारी ने तो यहां तक कहा कि सेटिंग कर लो, बिल ठीक हो जाएगा।
600 का बिल, अबकी आठ हजार का आया
नौगवां निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि उनके यहां प्रत्येक महीने 600-700 रुपये का बिल आता है, लेकिन इस बार आठ हजार रुपये का बिल आया है, जो बहुत अधिक है। अधिक बिल आने की शिकायत कई बार कर चुके हैं, लेकिन अफसर हर बार अगले सप्ताह आने को कहकर टहला देते हैं। प्रमोद ने बताया कि वह कुछ दिन पहले भी दफ्तर गए थे, तब बाबू जिस तरीके से बात कर रहा था, उससे साफ था कि बगैर कुछ दिए बिल ठीक होने से रहा।
गांव रमपुरा निवासी हरिशंकर ने बताया कि हर महीने 200 रुपये का बिल आता था, लेकिन इस महीने 1600 का आया है। हरिशंकर ने बताया कि उनके गांव में और भी कई ऐसे लोग हैं, जिनका बिल बहुत ज्यादा आया है। लगातार शिकायत की जा रही है, लेकिन समाधान नहीं हो रहा है। वह शिकायत करने बिजली दफ्तर आए हैं।
अब डीएम से करेंगे शिकायत
अजीत डांडी निवासी नन्हे लाल भी मंगलवार को बिजली दफ्तर में अपना बिल सुधरवाने पहुंचे। नन्हे लाल ने बताया कि आठ हजार रुपये का बिल आया है, जो बहुत अधिक है। दो बार शिकायती पत्र दे चुके हैं, लेकिन अभी तक बिल ठीक नहीं हो सका है। अगर एक दो दिन में शिकायत का समाधान नहीं हुआ तो डीएम के यहां शिकायत करेंगे।
मीटर रीडर कर रहे खेल
बिलों में गड़बड़ी के लिए सीधे तौर पर मीटर रीडर जिम्मेदार हैं। दरअसल प्राइवेट एजेंसी के पास रीडिंग का जिम्मा है। एजेंसी अपने कर्मचारी लगाकर मीटरों की रीडिंग कराती है। इन मीटर रीडरों के तार विभाग के उन बाबुओं से जुड़े होते हैं, जहां रीडिंग की फीडिंग होती हैं। उपभोक्ता जब बड़े अधिकारी के पास जाता है तो उसे जेई के पास जाने को कहा जाता है।
जेई कहता है कि जितनी बिजली फूंकी होगी, उतना ही बिल आएगा। ज्यादा है तो मीटर चेक करा लो। मीटर चेक करने के जेई को प्रार्थना पत्र देकर रसीद कटवानी होती है, लेकिन इसके लिए भी उपभोक्ता की चप्पलें घिस जाती हैं। वसूली का सबसे बड़ा फंडा यह है कि कर्मचारी बिल सही करने पर कम और कनेक्शन काटने पर ज्यादा ध्यान देता है। ऐसे में ले-देकर उपभोक्ता जल्द से जल्द बिल सही कराने की जुगत में रहते हैं।
ऊर्जा निगम के एक्सईएन सुधीर भारती ने कहा कि कुछ उपभोक्ताओं के बिजली बिल अधिक आए हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि बिल अधिक किस वजह से आ रहे हैं। जो उपभोक्ता शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, उनकी समस्या का समाधान कराया जा रहा है।