पीलीभीत। लंबे समय से वजूद की तलाश में जुटी कांग्रेस पार्टी को मजबूत बनाने के लिए हाईकमान चाहे जितने जतन कर ले, मगर जनपद स्तर पर गुटबाजी से पार्टी का पीछा नहीं छूट रहा। शहर और जिला कमेटी के बीच चली आ रही खींचतान नगर अध्यक्ष बदलने पर भी नहीं थमी। अब ‘राहुल प्रियंका गांधी सेना’ के नाम से बने नए संगठन को लेकर दोनों गुटों में मामला गरमा गया है।
कांग्रेस नेताओं में गुटबाजी होना कोई नई बात नहीं है। अभी तक जिलाध्यक्ष हरप्रीत सिंह चब्बा और पूर्व शहर अध्यक्ष वीरेंद्र रस्तोगी की टीम अलग कार्यक्रम करके पार्टी के अंदर की खींचतान को उजागर कर रही थी। पिछले दिनों शहर अध्यक्ष पद पर चब्बा गुट के मुनेंद्र पाल सक्सेना को जिम्मेदारी मिल गई। तब कयास लगाए जा रहे थे कि अब कांग्रेस में दो गुट नहीं रहेंगे। मगर तीन दिन पहले ‘राहुल प्रियंका गांधी सेना’ नाम से पार्टी में नया फ्रंटल संगठन सामने आ गया। इस संगठन में अधिकांश लोग वही हैं जो अब तक कांग्रेस जिलाध्यक्ष के विरोध में दूसरे गुट में थे। नतीजतन एक बार फिर दोनों के प्रदर्शन या धरना अलग-अलग होना शुरू हो गए हैं। शुक्रवार को यूरिया को लेकर हुए धरना प्रदर्शन भी दोनों संगठनों ने अलग-अलग विरोध किया।
जिलाध्यक्ष बोले... ऐसा कोई फ्रंटल संगठन कांग्रेस का हिस्सा नहीं
जिलाध्यक्ष कांग्रेस हरप्रीत सिंह चब्बा का कहना है कि ‘राहुल प्रियंका गांधी सेना’ नामक संगठन का कांग्रेस से कोई लेना देना नहीं है। प्रदेश हाईकमान से जो हमें लिस्ट मिली है, उसमें भी इस नाम का कोई संगठन नहीं है।
‘कांग्रेस का ही है संगठन, दो साल से चल रहा’
राहुल प्रियंका गांधी सेना के जिलाध्यक्ष अभिनय गुप्ता गोल्डी का कहना है कि उनका संगठन कांग्रेस का ही अंग है। दो साल से अन्य प्रदेशों में भी यह चल रहा है। उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में कार्यकारिणी काम कर रही है। यह संगठन उपेक्षा का शिकार हुए पुराने कांग्रेसियों को शामिल करके उनके अनुभवों से पार्टी को मजबूत करने पर काम कर रहा है।