स्थानांतरित कार्यवाहक सीएमओ के रिलीव न किए जाने से हो रही फजीहत के बाद
आखिर बृहस्पतिवार को एडी डॉ. सुबोध कुमार ने पीलीभीत पहुंचकर उन्हें एकतरफा
कार्यमुक्त कर एसीएमओ डॉ. अजय वर्मा को सीएमओ का चार्ज सौंपा है। वहीं 15
दिन पूर्व स्थानांतरित डॉक्टर और सस्पेंड हुए दोनों बाबू अभी भी जमे हुए
हैं।
स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों काफी उथल पुथल मची हुई है। पिछले
दिनों जिला अस्पताल के कुछ चिकित्सकों के दूसरे जनपद में स्थानांतरण हुए
थे। इसके बाद सीएमओ कार्यालय के दो बाबू सस्पेंड हो गए थे। उसके दूसरे दिन
कार्यवाहक सीएमओ का गैर जनपद स्थानांतरण हुआ। इसके अगले दिन 30 जून को
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र सिंह का स्थानांतरण रामपुर कर दिया गया।
इसमें सबसे खासबात यह रही कि स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी से पूर्व
स्थानांतरित चिकित्सक, सीएमओ और सस्पेंड बाबुओं को रिलीव नहीं किया, जबकि
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी को सात जुलाई को रिलीव कर दिया। विभाग में चल रही
इस कार्रवाई की काफी रही। अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रहीं
थी। इस पर एडी (हेल्थ) डॉ. सुबोध कुमार बृहस्पतिवार को पीलीभीत पहुंचे।
यहां जिला एवं महिला अस्पताल के निरीक्षण की औपचारिकता निभाने के बाद वह
सीएमओ कार्यालय पहुंचे और स्थानांतरित सीएमओ डॉ. ओम चौहान के अवकाश पर होने
के कारण उन्हें एक तरफा कार्यमुक्त कर एसीएमओ डॉ. अजय वर्मा को कार्यभार
ग्रहण करा दिया।
बाबू को मिला आदेश स्पष्ट न होने का लाभ
स्थानांतरित
सीएमओ को तो एडी हेल्थ ने रिलीव कर दिया लेकिन सस्पेंड हुए दोनों बाबुओं
को कार्यमुक्त नहीं कर सके। पूछने पर उन्होंने बताया कि बाबुओं का निलंबन
आदेश स्पष्ट आदेश नहीं है। इसकी सूचना शासन को भेजी जा रही है। दिशा
निर्देश मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ को मानहानि का नोटिस
रामपुर
स्थानांतरित किए गए स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र चंद्र सिंह ने
सीएमओ द्वारा की गई शिकायत में लगे आरोपों और समाचार पत्रों में सीएमओ
द्वारा दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए उन पर मानहानि का नोटिस भेजा है।
उन्होंने कहा है कि वह न तो तीन जनवरी 2009 से सीएमओ के आदेश पर जिला
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के पद पर तैनात हैं, न ही सरकारी आवास और गाड़ी
पर भी जबरन कब्जा किया है। आवास और गाड़ी के उपयोग के लिए उनके वेतन से
नियमानुसार कटौती हो रही है। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी का आरोप है कि सीएमओ
ने उन पर गलत आरोप लगाकर व समाचार पत्रों में गलत बयान देकर उनकी छवि को
धूमिल किया है। 15 दिन में जवाब न देने पर मानहानि का मुकदमा किया जाएगा।
सीएमओ को नोटिस के साथ ही उन्होंने डीएम को भी पत्र लिखकर सीएमओ कार्यालय
में उनके खिलाफ रची जा रही साजिश की शिकायत की है।