फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गरीबों को 11 साल में नहीं हो पाया 300 कांशीराम आवासों का आवंटन

विज्ञापन
विज्ञापन
बीसलपुर। बसपा सरकार में गरीबों के रहने के लिए वर्ष 2011 में 300 आवासों की कांशीराम कॉलोनी बनाई गई थी। जब तक इन आवासों के आवंटन का नंबर आया तब तक राज्य में सपा की सरकार बन गई। अफसर इस ओर से पूूरी तरह शिथिल हो गए। पांच साल सपा की सरकार रहने के बाद साढ़े चार साल भाजपा की सरकार को भी हो चुके हैं, लेकिन आठ करोड़ सें ज्यादा की लागत से बने कांशीराम आवास 11 साल बाद भी गरीबों को आवंटित नहीं हो पाए। जबकि आवास विहीन तमाम परिवार दशकों से किराए के भवनों में रहने को मजबूर हैं और झुग्गी झोंपड़ियों में रह रहे हैं। आवास पाने के लिए लाभार्थी संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगाते लगाते परेशान हो गए हैं।वर्ष 2011 में बसपा सरकार में तत्कालीन मुख्य मंत्री मायावती ने गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए लगभग प्रत्येक शहर और कस्बे में कांशीराम कालोनिया बनाई थी। इसी क्रम में बीसलपुर में भी डायट के पास 300 आवासों की काशीराम कालोनी बनवाई गई थी। इन आवासों का निर्माण आवास विकास परिषद बरेली खंड ने 8.10 करोड़ की लागत से किया था। कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तृतीय चरण में बने इन आवासों का आवंटन बसपा सरकार में नहीं हो पाया था। उसके बाद प्रदेश में सपा की सरकार बन गई। उसमें ये कांशीराम आवास उपेक्षित हो गए। वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार आई तब भी इन आवासों के आवंटन की पहल नहीं हो पाई। अब कांशीराम कालोनी के भवन जर्जर होने लगे हैं, जबकि नगर में तमाम परिवार किराए के घरों में घरों में रहने को मजबूर हैं। इन कांशीराम आवासों में दिन के समय जुंआरी जुआ खेलते हैं। और असामाजिक तत्व शरण लेते हैं। अधिकांश अवासों की खिड़कियों में लगाए गए शीशे टूट गए हैं। आवासों के शौचालय भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। 11 साल बीतने के बाद भी प्रशासन आवास का आवंटन तो दूर की बात है कि वह पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं कर सका है। जबकि यही अफसर बसपा शासन काल में तत्कालीन मुख्य मंत्री मायावती के दौरे की भनक लगते ही कांशीराम कालोनी की ओर भागने लगते थे। अब हालात यह है कि 300 आवास जर्जर तक होने लगे, लेकिन आवंटन नहीं हो पाया।
विज्ञापन

वह पिछले 15 वर्षों से किराये के मकान में सपरिवार रह रहे हैं। कांशीराम आवास के लिए सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आवेदन कर चुके हैं। मगर अभी तक आवास आवंटन नहीं हो पाया। अब आवास मिलने की उम्मीद न के बराबर रह गई है। - आरके गुप्ता,, मोहल्ला दुर्गाप्रसाद
वह पिछले नौ वर्षों से किराये के मकान में सपरिवार रह रहा हूं। मजदूरी करता हूं। आधा पैसा मकान के किराये ही चला जाता है। आवास प्राप्त करने के लिए बिल्कुल सही समय पर आवेदन कर दिया था। अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। अब पूरी तरह से हताश हो चुके हैं। - राजीव कुमार, मोहल्ला बख्तावरलाल
विज्ञापन

मजदूरी करने में पूरे महीने में मिलने वाले पैसे का 60 प्रतिशत भाग मकान के किराये में चला जाता है। उन्होंने आवास प्राप्त करने के लिए सारे मानक पूरे करते काफी समय पहले ही प्रार्थना पत्र नगरपालिका कार्यालय में जमा कर दिया था। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। - नंदप्रकाश मोहल्ला कटरा बाजार
कांशीराम कालोनी में ओवरहेड टैंक निर्माणाधीन है। ओवरहेड टैंक बनते ही कॉलोनी में पानी की समस्या नहीं होगी। डीएम से अनुमति लेने के बाद आवास आवंटन की कार्यवाही नियमानुसार शुरू की जाएगी।- वंदना शर्मा, ईओ नगरपालिका बीसलपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें