पीलीभीत। सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण भारत-नेपाल सीमा पर सड़क का निर्माण पिछले साढ़े आठ साल से लटका है। लोक निर्माण विभाग (इंडो-नेपाल बार्डर) ने एनओसी के लिए आवेदन किया था, लेकिन पीटीआर प्रशासन ने इसमें खामियां बताकर दो माह पहले पत्रावली लौटा दी थी। लोक निर्माण विभाग ने अब एनओसी के लिए नए सिरे से पत्रावली तैयार करके आवेदन किया है।
भारत-नेपाल की सीमा खुली होने की वजह से तस्करी और देश विरोधी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वर्ष 2011 में पेट्रोलिंग के लिए सीमा के समांतर सीमा सड़क बनाने के लिए मंजूरी दी गई थी। करीब 600 किलोमीटर लबी यह सड़क पीलीभीत के अलावा लखीमपुर, बहराइच, श्राबस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज जनपद से होकर गुजरेगी। वर्ष 2012 में इस सड़क का निर्माण शुरू किया गया। उस दौरान 2.18 किमी लंबी सड़क का निर्माण हुआ था, लेकिन इसके आगे निर्माण थम गया। वजह यह थी कि सीमा सड़क का पीलीभीत में एक बड़ा हिस्सा पीटीआर क्षेत्र में आ रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा एनओसी न मिलने से सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है।
हालांकि बाद में किए गए सर्वे के अनुसार पीलीभीत टाइगर रिजर्व के 1200 पेड़ सड़क में आ रहे हैं। सड़क की चौड़ाई भी कम कर दी गई है। इसकी रिपोर्ट पीटीआर प्रशासन ने शासन को भेज दी है।
इधर, सड़क निर्माण में आ रही तमाम बाधाएं दूर होने के बाद लोक निर्माण विभाग (इंडो-नेपाल बार्डर) द्वारा शासन स्तर पर जनवरी में एनओसी के लिए आवेदन किया गया था। पीलीभीत में सीमा सड़क 48.12 किमी लंबी बनना है। शासन स्तर से यह पत्रावली उस दौरान पीटीआर को भेजी गई थी। पीटीआर के अफसरों ने दो माह पूर्व पत्रावली में खामियां बताकर इसे लोक निर्माण विभाग को लौटा दी थी। वन अफसरों का कहना था कि पत्रावली बेहद महत्वपूर्ण हैं और इसे भारत सरकार तक भेजा जाना है। अब विभाग ने नए सिरे से 50-60 बिंदुओं पर आधारित पत्रावली तैयार की। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने अब पत्रावली तैयार करके एनओसी के लिए दोबारा आवेदन किया है। वन विभाग को दो तरह की एनओसी देनी है। एक एनओसी वन और दूसरी वन्यजीव से जुड़ी है। पीटीआर प्रशासन इस पत्रावली के बिंदुओं का अवलोकन करने के बाद इसे शासन को भेजेगा।
भारत-नेपाल सीमा सड़क निर्माण को लेकर एनओसी के लिए पूर्व में आवेदन किया गया था। पीटीआर ने पत्रावली पर आपत्ति लगाते हुए इसे वापस कर दिया था। अब बिंदुवार एनओसी की पत्रावली तैयार करके नए सिरे से आवेदन किया गया है। - मनोज कुमार, अवर अभियंता, लोक निर्माण विभाग इंडो-नेपाल बार्डर