पूरनपुर। कोरोना संक्रमण बढ़ने पर सहालग के दिनों में लॉकडाउन लग गया और कपड़ा व्यापार चौपट हो गया। अब सहालग बीतने के बाद दुकानें तो खुल गई हैं, मगर ग्राहक नहीं मिल रहे। इससे कपड़ा व्यापारी परेशान हैं। उनका कहना है कि नुकसान की भरपाई तो होने से रही। मगर इन दिनों जिस तरह से खरीदारी चल रही है, उससे तो मौजूदा समय का खर्च निकालना भी मुश्किल पड़ रहा है। लोग सिर्फ रोजमर्रा की जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं।
जिले में पूरनपुर तहसील खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी है। तहसील क्षेत्र के सैकड़ों लोग विदेशों में है। अधिकतर लोग अच्छा रहन-सहन, अच्छे पहनावे के शौकीन हैं। नगर का बाजार भी जिला मुख्यालय से कम नहीं आंका जाता। कपड़ा बाजार भी पीछे नहीं है। सीजन के समय तो एक दिन में बिक्री लाखों में चली जाती है। मगर कोरोना महामारी ने कपड़ा व्यापारियों की कमर तोड़ दी। पिछले लॉकडाउन से कपड़ा व्यापारी उभर ही पाए थे। होली के बाद होने वाली सहालगों को लेकर व्यापारियों ने मॉल का स्टाक भी किया था। मगर सहालगों के शुरू होने से पहले कोरोना को लेकर लॉकडाउन लग गया। शादियां तो हुई मगर पाबंदी के साथ। इससे नुकसान ही रहा। अब एक जून से अनलॉक तो हुआ, मगर बाजार रफ्तार नहीं पकड़ सका है। व्यापारियों का कहना है कि सहालग तो निकल गया, अब बाजार कैसे तेजी पकड़ेगा, समझ नहीं आ रहा है।
व्यापारियों का दर्द
लॉकडाउन को लेकर पहले तो दुकानें ही बंद रहीं। इससे व्यापार ठप रहा। दुकानें खुलीं तब सहालग निकल चुके थे। अब तो बरसात शुरू हो गई। अब तो रोजमर्रा की जरूरत वाले ग्राहक कपड़ा खरीदने पहुंच रहे हैं। - राकेश गुप्ता
सहालग के सीजन को लेकर माल का स्टॉक किया था। लॉकडाउन में दुकानें बंद रहीं। स्थानीय बाजार फसल के ऊपर रहता है। गेहूं की फसल कटकर बिक्री हो गई। फुटकर व्यापारी जो कपड़ा खरीद कर ले गए। समय पर भुगतान करने नहीं आ रहे हैं। - मनमोहन खन्ना
जब व्यापार का समय आया, तब प्रतिष्ठान बंद करने पड़े। लॉकडाउन से आम आदमी भी आर्थिक तंगी से जूझने लगा। शादियों, पार्टियों में अब जाना नहीं है। ऐसे में लोग महंगे कपड़े न खरीदकर रोजमर्रा में पहनने के कपड़े खरीद कर काम चला रहे हैं। - बृजमोहन खंडेलवाल
बाजार खुलने के बाद कपड़े के व्यापार ने रफ्तार नहीं पकड़ी। वजह कपड़ा बिक्री का समय निकल गया। लॉकडाउन से 50 प्रतिशत भी व्यापार इस बार नहीं हुआ। शोरूम, कर्मचारियों का खर्चा निकालना भी कई व्यापारियों के लिए कठिन सा हो गया है। - रवि गुप्ता