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पहले शिक्षामित्र मां ने छोड़ा साथ, दसवें दिन संक्रमित पिता की भी हो गई मौत

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पीलीभीत। पंचायत चुनाव के बाद कोरोना संक्रमण से बेसिक शिक्षा विभाग के कई शिक्षकों ने अपनी जान गंवाई।, मगर विभाग में कुछ ऐसे भी कर्मचारी है, जिनकी मौत के बाद उनकी संतानें बेसहारा हो गई। इन्हीं में से एक प्राथमिक विद्यालय फैजुल्लागंज में तैनात शिक्षामित्र कृष्णा देवी हैं। कृष्णा देवी की मौत कोविड अस्पताल में सात मई को हो गई। पत्नी की देखभाल के दौरान पति चंद्रभान राम भी संक्रमित हो गए। दसवें दिन चंद्रभान राम ने भी गाजीपुर के कोविड अस्पताल में दम तोड़ दिया। शिक्षामित्र की बड़ी बेटी की तो शादी हो चुकी है। एक पुत्र और पुत्री अविवाहित है। बेसहारा होने के बाद अब दोनों ने गाजीपुर में अपने नाना के घर शरण ले रखी है।
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कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव फैजुल्लागंज निवासी कृष्णा देवी (51) गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र थी। वर्ष 2015 में हाईकोर्ट के आदेश पर कृष्ण देवी शिक्षिका पद पर समायोजित की गई। शिक्षिका बनने के बाद कृष्णादेवी ने भी बच्चों की बेहतर शिक्षा और अच्छा बनाने का सपना देखा, मगर वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा समायोजित शिक्षकों का समायोजन रद्द कर दिया गया। जिससे कृष्णा देवी भी फिर शिक्षामित्र के पद पर समायोजित कर दी गईं। कृष्णा देवी के 23 वर्षीय पुत्र आदित्य कुमार राव ने बताया कि मां की पंचायत चुनाव के दौरान मतदान में ड्यूटी लगी थी। घर आने के अगले दिन 27 अप्रैल को मां को बुखार-खांसी आने लगी। इस पर दवाएं दी गई। पत्नी की देखभाल के दौरान 29 अगस्त को पति चंद्रभान राम (55) की भी हालत बिगड़ गई। माता-पिता की तबीयत खराब होने की जानकारी पर पांच मई को इलाहाबाद में पढ़ाई छोड़ घर आ गया। अगले दिन छह मई को सुबह ही मैं पिता को लेकर सीएचसी पूरनपुर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत देख कोविड जांच की। पिता को घर लेकर आ गया। घर में मां की बिगड़ती हालत देख मैं माता-पिता को लेकर उसी दिन सीएचसी माधोटांडा पहुंच गया। जहां डॉक्टरों ने दोनों को एल-2 अस्पताल पीलीभीत के लिए रेफर कर दिया। अस्पताल में पहुंचने के बाद माता-पिता का इलाज शुरू हो गया, मगर रात में मां की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। ऑक्सीजन लगाई गई, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। सात मई को सुबह साढ़े नौ बजे मां ने दम तोड़ दिया। मैंने पीलीभीत के ही मुक्तिधाम में मां का अंतिम संस्कार कर दिया। फिर अस्पताल आ गया। मां की मौत की खबर सुनकर गाजीपुर में रहने वाले मेरे मामा और रिश्तेदार आ गए। पिता की बिगड़ती हालत देख आठ मई को उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे गाजीपुर ले जाकर कोविड अस्पताल में भर्ती कराया। वहां के कोविड इंचार्ज मेरे मामा के परिचित थे। जहां पिता का इलाज चलता रहा। कुछ सुधार भी हुआ, मगर 15 मई को पिता की तबीयत फिर बिगड़ गई। इसके बाद तबीयत बिगड़ती चली गई और 17 मई को पिता ने भी साथ छोड़ दिया। गाजीपुर से दूरभाष पर बात करते-करते आदित्य फफक-फफक कर रो पड़ा।
अब पढ़ाई करके क्या करूंगा, बस बहन को नौकरी मिल जाए
शिक्षामित्र कृष्णा देवी की दो पुत्रियां और एक पुत्र है। इसमें बड़ी पुत्री सुमन विवाहित है और अपनी ससुराल है। माता-पिता के साथ आदित्य और उनकी छोटी बहन सूबी ही रहते थे। आदित्य मां की इच्छा पर इलाहाबाद में रहकर पढ़ाई कर रहा था। माता-पिता की मौत के बाद आदित्य और सूबी बेसहारा हो गए। फिलहाल अभी दोनों गाजीपुर में अपने नाना के यहां रह रहे हैं। दूरभाष पर आदित्य ने कॅरियर के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि अब पढ़ाई करके किसको दिखाऊंगा। मां की इच्छा थी, पर मां तो चली गई। बस मेरी बहन की नौकरी लग जाए ताकि उसका भविष्य सुरक्षित हो सके। हालांकि आदित्य बीटीसी करने के साथ टीईटी क्वालीफाई भी है, मगर अपनी बहन के भविष्य को लेकर उन्होंने खुद आवेदन न कर बहन का आवेदन कराया।
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